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इंदौर के MYH अस्पताल में चूहों के कुतरने से बच्चे की मौत का मामला: डीन को नोटिस-कई सस्पेंड!

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Khabar Pradhan Desk

संवाददाता

3 September 2025, 11:43 AM

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इंदौर के MYH अस्पताल में चूहों के कुतरने से बच्चे की मौत का मामला: डीन को नोटिस-कई सस्पेंड!

3 सितंबर 2025: इंदौर का सबसे बड़ा MYH सरकारी अस्पताल मैं चूहों के आतंक के शिकार हुए दो नवजात में से एक बच्ची की कल मौत हो गई। दूसरी की हालत गंभीर बनी हुई है । इस मामले में अस्पताल प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए रात की ड्यूटी पर तैनात नर्स को आकांक्षा बेंजामिन और श्वेता चौहान को निलंबित कर दिया है।

मेडिकल एजुकेशनल कमिश्नर ने अस्पताल के डीन डॉ अरविंद घनघोरिया और अधीक्षक डॉ अशोक यादव ,नर्स कलावती बालवी, पी आई सी यू इंचार्ज प्रवीण सिंह और पीडियाट्रिक सर्जरी प्रभारी HOD डॉ मनोज जोशी को नोटिस जारी किया है।
राज्य शासन ने 6 सदस्य हाई लेवल जांच कमेटी गठित की है । इसमें डॉक्टर एसबी बंसल ,डॉ शशि शंकर शर्मा, डॉ अरविंद शुक्ला, डॉ निर्भय मेहता ,डॉक्टर बसंत निगवाल और सिस्टर दयावती दयाल शामिल है। डीन को यह कमेटी 7 दिन में रिपोर्ट पेश करेगी।

पेस्ट कंट्रोल एजेंसी पर लगाया जुर्माना:
पेस्ट कंट्रोल एजेंसी एजाइल सिक्योरिटी सर्विस पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। एजेंसी को ये चेतावनी भी दी गई है, कि यदि भविष्य में इस प्रकार की गड़बड़ी मिलती है तो उसे ब्लैक लिस्ट भी कर दिया जाएगा।

अस्पताल की लापरवाही:
चूहों के आतंक से शिकार हुई दो नवजात बच्चियों का मामला गहराता जा रहा है।
धार की अंजू की नवजात बेटी जन्म से दिल की बीमारी से पीड़ित थी। 31 अगस्त को अस्पताल में भर्ती की गई थी। रविवार को ही रात में चौहान में नवजात की तीन उंगलियां उत्तर प्रदेश खून बहाने से हालात बिगड़ी और मंगलवार को सुबह इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई।
एक अन्य केस में एक नवजात 12 से 15 दिन की थी देवास के बागली जिले से रेफर की गई थी उसकी स्थिति काफी गंभीर है। इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
अधीक्षक डॉक्टर यादव ने अपनी सफाई में कहा है जिस नवजात की मौत हुई ,उसकी स्थिति पहले से ही काफी गंभीर थी। उसका वजन सिर्फ 1.02 किलो ही था।
हार्ट भी पूरी तरह बना नहीं था उसकी मौत चूहों के काटने से नहीं हुई।

अधीक्षक को बचाने का मामला:
अस्पताल के दिन डॉक्टर अरविंद घंगोरिया ने अधीक्षक डॉक्टर अशोक यादव से सिर्फ पेस्ट कंट्रोल की जानकारी मांगी है।
इस वजह से पूरे मेडिकल कॉलेज में यह चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों को संदेह है कि अधीक्षक को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

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