अब राष्ट्रगान से पहले 3.10 मिनट का वंदे मातरम गाना होगा अनिवार्य :गृह मंत्रालय दिए दिशा निर्देश:
संवाददाता
12 February 2026
अपडेटेड: 3:24 PM 0thGMT+0530
राष्ट्रगान – जन गण मन से पहले होगा वंदे मातरम् :
सभी 6 पैरा गाना होगा जरूरी:
वंदे मातरम गीत के 150 साल पूरे होने के अवसर पर केंद्र सरकार ने इस राष्ट्रीय गीत के सम्मान को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है l
केंद्र सरकार की ओर से ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं। सरकार का कहना है कि इस गीत के केवल पहले दो छंद ही नहीं, बल्कि इसके सभी छह छंद गाए जाने चाहिए।
सरकारी निर्देश के अनुसार, ‘जन गण मन’ से पहले ‘वंदे मातरम्’ का संपूर्ण गायन अनिवार्य होगा।
साथ ही स्कूलों और सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी इसके सभी छंदों को शामिल करने पर विशेष जोर दिया गया है।
सरकार का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ देशभक्ति और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है, इसलिए इसे पूर्ण रूप से ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
जब भी वंदे मातरम और जन गण मन एक साथ गए या बजाए जाएं तो वंदे मातरम पहले गाना होगा राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे पूरे 3 मिनट 10 सेकंड में गाने होंगे ,जबकि राष्ट्रगान के गायन का की कुल अवधि 52 सेकंड है l
जब किसी डॉक्यूमेंट्री या फिल्म में इसे बजाया जाए तब खड़े न होने की छूट दी गई है ,क्योंकि इससे फिल्म की प्रस्तुति में बाधा आ सकती है l
इसे नहीं गाने पर अभी किसी भी दंड या कानूनी कार्यवाही का प्रावधान नहीं है l
*राष्ट्रगीत का इतिहास*
वंदे मातरम राष्ट्रगीत की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में की थी यह गीत 1882 में उनके उपन्यास ‘आनंद मठ’ में छपा था l
इसकी मूल धुन रवींद्रनाथ टैगोर ने बनाई थी l लेकिन आज की धुन यदुनाथ भट्टाचार्य जी की बनाई हुई हैl
1950 में 24 जनवरी को संविधान सभा ने इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया था l तब तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि इस गीत को राष्ट्रगान के समान ही सम्मान देंगे l
1905 के बंगाल विभाजन के दौरान यह गीत ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बन गया l उस वक्त स्वतंत्रता सेनानी जेल जाते समय या लाठियां खाते समय और यहां तक की फांसी पर झूलते समय भी इस गीत को ही गाते थे l
2002 के बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के अंतर्राष्ट्रीय सर्वे में वंदे मातरम गीत को दुनिया का दूसरा सबसे लोकप्रिय गीत बताया गया था l
1907 में मैडम भीकाजी कामा ने जर्मनी में जो भारत का पहला तिरंगा फहराया था उसके बीच में भी वंदे मातरम लिखा हुआ था l
वंदे मातरम की 150वी वर्षगांठ पर सरकार का यह कदम अत्यंत ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण माना जा रहा है l
यह न केवल राष्ट्रगीत ही गरिमा को बढ़ाता है, बल्कि इसे राष्ट्रीय जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाते हुए भारत के गौरव का प्रतीक भी बना रहा है l
ऐसे में वंदे मातरम अब केवल भावनाओं का प्रतीक नहीं रहेगा बल्कि प्रत्येक औपचारिक अवसर पर राष्ट्रीय एकता और सम्मान का उद्घोष बनेगा l