अब 10 मिनट में नहीं होगी डिलीवरी,  क्विक कॉमर्स प्लेटफार्म ने डेडलाइन हटाई:

khabar pradhan

संवाददाता

14 January 2026

अपडेटेड: 5:16 PM 0thGMT+0530

अब 10 मिनट में नहीं होगी डिलीवरी,  क्विक कॉमर्स प्लेटफार्म ने डेडलाइन हटाई:



देशभर के गिग वर्कर्स  पिछले महीनों हड़ताल पर रहे । आज उनकी हड़ताल सफल हुई।
22 शहरों के एक लाख से ज्यादा गिग वर्कर्स ने हड़ताल की थी।  यूनियनों का कहना है कि कंपनियां 10 मिनट डिलीवरी के नाम पर श्रमिकों का शोषण कर रही है । 12 से 14 घंटे काम करने पर भी कई वर्कर्स ₹25000 से कम कमाते हैं।  वह न्यूनतम वेतन, तय काम के घंटे, ओवर टाइम और सामाजिक सुरक्षा की मांग कर रहे थे।

सरकार ने उठाया बड़ा कदम:

देश भर के गिग वर्कर्स पर सरकार ने
बड़ा कदम उठाया है।  केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडवीया के हस्तक्षेप के बाद ब्लिंकिट जैसी क्विक फॉर कॉमर्स कंपनियों ने 10 मिनट में डिलीवरी की अनिवार्य समय सीमा हटाने पर सहमति जता दी है।  इस संबंध में ब्लिंकिट, जेप्टो ,जोमैटो और स्विग्गी समेत प्रमुख प्लेटफार्म के साथ एक बैठक हुई । जिसमें इनसे जुड़ी चिंताओं पर चर्चा की गई।
ब्लिंकिट ने इस निर्देश पर पहले ही अमल कर लिया है।  उसने अपनी ब्रांडिंग से 10 मिनट में डिलीवरी का वादा हटा दिया है । ब्लिंकिट ने अपनी ब्रांड मैसेजिंग में भी संशोधन किया है।  कंपनी ने प्रमुख टैगलाइन ‘अब 10 हजार से ज्यादा उत्पाद 10 मिनट में’— डिलीवर से बदलकर ’30 हजार से ज्यादा उत्पाद आपके दरवाजे तक’ कर दी है । अन्य एग्रीगेटर से भी आने वाले दिनों में इसी तरह का कदम उठाने की उम्मीद है।

डिलीवरी बॉय की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु:
यह फैसला गिग वर्कर्स की सुरक्षा संरक्षण और बेहतर कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने एक बैठक में डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और समय सीमा हटाने की बात कही थी।

सरकार ने कंपनियों को स्पष्ट संदेश दिया कि फास्ट डिलीवरी के दबाव में डिलीवरी बॉय की जान जोखिम में पड़ सकती है।
10 मिनट की टाइम लिमिट के चलते डिलीवरी बॉय पर दबाव बढ़ जाता है।  जिससे सड़क हादसों की आशंका  रहती है । इसे लेकर 31 दिसंबर की रात गिग वर्कर्स ने हड़ताल भी की थी।‌ सभी गिग वर्कर्स ने सरकार से अपील की थी कि उनकी सुरक्षा को लेकर सुनिश्चित कदम उठाए जाएं । इसके बाद सरकार ने कंपनियों से बात कर कहा कि सुरक्षा पहले ज्यादा जरूरी है।


आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने भी उठाया था मुद्दा:
डिलीवरी बॉय की सुरक्षा हेतु हाल ही में संसद सत्र के दौरान आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने भी गिग वर्कर्स की पीड़ा और कठिनाइयों का मुद्दा उठाया था।  उन्होंने कहा था कि यह कामगार अत्यधिक दबाव में और कई बार कठिन मौसम परिस्थितियों में भी काम करते हैं ।

कंपनियों का तर्क:
जोमैटो के संस्थापक और सीईओ  दीपेंद्रर गोयल का कहना है कि रफ्तार की नहीं इंजीनियरिंग की बात है।  डार्क स्टोर्स 400 मीटर से 2 किलोमीटर के भीतर होते हैं । राइडर्स की औसत गति 16 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जाती है।

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