अमेरिकी मंत्री का बयान: भारत को चीन जैसी आर्थिक ताकत बनने नहीं देंगे

khabar pradhan

संवाददाता

7 March 2026

अपडेटेड: 5:56 PM 0thGMT+0530

अमेरिकी मंत्री का बयान: भारत को चीन जैसी आर्थिक ताकत बनने नहीं देंगे

7 मार्च 2026

नई दिल्ली।

भारत तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है और शायद अमेरिका यह बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है । क्योंकि स्वयं अमेरिका अपने आप को दुनिया का महाशक्ति समझता है और किसी और देश को आगे निकलता हुआ नहीं देख सकता। इसी कारण चीन उसका बड़ा प्रतिद्वंद्वी भी बना हुआ है। एक समय था जब अमेरिका ने चीन की बहुत मदद करी थी किंतु चीन ने उसकी दादागिरी को स्वीकार नहीं किया। अमेरिका चीन के साथ की गई गलती को दोहराना नहीं चाहता इस वजह से वह भारत को हर हालत में आगे बढ़ने से रोकना चाहता है।

अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर ने भारत की तारीफ करते हुए कहा 21वीं सदी में भारत एक निर्णायक शक्ति बनने वाला है। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से उभर रहा है। भारत में अपार आर्थिक, मानव और अन्य संसाधन हैं, जिससे भारत 21वीं सदी में तेजी से बढ़ता हुआ एक ऐसा देश है जो भविष्य में विश्व की दिशा तय कर सकता है।
अमेरिका की 20 साल पहले क्या गलती की थी?
19वीं शताब्दी में अमेरिका ने चीन को अपने हिसाब से ढालना शुरू किया था। अमेरिका खुद को चीन का बाॅस मानता था और चीन कोअपना चेला । चीन ने अमेरिका की बहुत मदद ली, मगर उसने अपना रास्ता बेहद मजबूती से चुना और अमेरिका के अधिकार को नकार दिया। और फिर यहीं से दोनों देशों के बीच रिश्तों में दरार आनी शुरू हो गई थी।

भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों के बीच एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। नई दिल्ली में आयोजित ‘रायसीना डायलॉग’ के दौरान अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका भारत को चीन की तरह बड़ी आर्थिक प्रतिस्पर्धी शक्ति बनने देने की गलती दोहराना नहीं चाहता।

अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडो ने कहा कि भारत अमेरिका का महत्वपूर्ण साझेदार है, लेकिन यह साझेदारी कुछ सीमाओं और शर्तों के साथ आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने बाजार तक भारत की बिना शर्त पहुंच नहीं देगा, क्योंकि वह चीन के साथ की गई पिछली गलतियों को दोहराना नहीं चाहता।

लैंडो ने कहा कि करीब 20 साल पहले चीन को वैश्विक बाजारों तक खुली पहुंच देने से वह आज अमेरिका का बड़ा आर्थिक प्रतिद्वंद्वी बन गया। इसलिए अब अमेरिका भारत के साथ व्यापारिक संबंधों में ज्यादा सावधानी बरतना चाहता है।

हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत 21वीं सदी में एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति बनकर उभर रहा है और अमेरिका के लिए एक अहम साझेदार है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग और रणनीतिक संबंध आगे भी मजबूत होते रहेंगे, लेकिन अमेरिकी नीति अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही तय की जाएगी।

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