ईरान में बड़ा उलटफेर: राष्ट्रपति हुए बेअसर, IRGC बनी ‘असली पावर’.
संवाददाता
2 April 2026
अपडेटेड: 3:52 PM 0ndGMT+0530
2 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:
ईरान के राजनीतिक गलियारे से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की सेना की ताकतवर शाखा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने देश के महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है। हालत यह है कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान की स्थिति महज एक औपचारिक पद तक सिमट कर रह गई है।
सुप्रीम लीडर की ‘रहस्यमयी’ अनुपस्थिति और IRGC का कब्जा
ईरान में सत्ता के इस बड़े बदलाव का मुख्य कारण सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की लंबी अनुपस्थिति को माना जा रहा है।
कहाँ हैं मोजतबा खामेनेई?
अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद पद संभालने वाले मोजतबा सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आ रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि वे या तो गंभीर रूप से घायल हैं या कोमा में हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने तो उनके ‘दिव्यांग’ होने तक का दावा कर दिया है।
सुप्रीम लीडर की अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए IRGC ने एक ‘सैन्य परिषद’ बना ली है, जो अब देश के रोजमर्रा के फैसले ले रही है। राष्ट्रपति द्वारा भेजे जाने वाली रिपोर्ट्स को भी सुप्रीम लीडर तक पहुँचने से रोका जा रहा है।
नियुक्तियों पर रोक और आंतरिक टकराव
IRGC प्रमुख अहमद वाहिदी ने राष्ट्रपति पेजेशक्यान द्वारा प्रस्तावित सभी उम्मीदवारों के नामों को खारिज कर दिया है। वाहिदी का तर्क है कि युद्ध जैसी स्थिति में सभी संवेदनशील पदों का चयन सीधे सेना (IRGC) द्वारा ही किया जाना चाहिए। IRGC अब न केवल सेना, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था, तेल व्यापार और सामरिक जलडमरूमध्य ‘होर्मुज’ पर भी अपना राज स्थापित कर चुका है।
होर्मुज में मानवीय त्रासदी: समुद्र के बीच ‘कैद’ हुए 20,000 नाविक
एक तरफ ईरान में सत्ता की जंग चल रही है, वहीं दूसरी तरफ होर्मुज स्टेट (Hormuz Strait) में फंसा अभूतपूर्व जाम करीब 20,000 नाविकों के लिए काल बन गया है।
खत्म हो रहा है राशन: पांच हफ्तों से फंसे जहाजों पर खाना और पीने का पानी खत्म होने की कगार पर है। इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (ITF) की हेल्पलाइन पर नाविकों के SOS संदेशों की बाढ़ आ गई है।
मजबूरी में काम: युद्ध क्षेत्र घोषित होने के बावजूद, कई जहाज मालिक नाविकों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर रहे हैं और उन्हें जबरन काम करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। नाविकों का कहना है कि वे मौत के साये में काम कर रहे हैं क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति उन्हें नौकरी छोड़ने की इजाजत नहीं देती।
नियमों की अनदेखी: नियमों के अनुसार, युद्ध क्षेत्र में काम करने वालों को दोगुना वेतन मिलना चाहिए, लेकिन हकीकत में कई नाविकों को न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा है।
ईरान के भीतर राष्ट्रपति और सैन्य नेतृत्व के बीच बढ़ते मतभेदों ने देश को ‘पूर्ण राजनीतिक गतिरोध’ की स्थिति में धकेल दिया है। जहां एक ओर देश की कमान सेना के हाथों में जाती दिख रही है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज में फंसे हजारों नाविकों की जिंदगी दांव पर लगी है।