एमएसपी पर दलहन खरीदी का फैसला: सीएम ने किसानों को बोनस का भरोसा दिलाया

khabar pradhan

संवाददाता

24 February 2026

अपडेटेड: 5:26 PM 0thGMT+0530

एमएसपी पर दलहन खरीदी का फैसला: सीएम ने किसानों को बोनस का भरोसा दिलाया

सरकार का बड़ा ऐलान, दलहन उत्पादन को मिलेगा प्रोत्साहन।
मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए एमएसपी के तहत चना, मसूर, तुअर और उड़द की खरीदी करने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरसों की तरह ही दलहनों की खरीदी भी भावांतर योजना के तहत की जाएगी, जिससे किसानों को उचित दाम मिल सके।

खरीदी प्रक्रिया तय, पंजीयन से लेकर भुगतान तक व्यवस्था।
सरकार के अनुसार चना, मसूर, उड़द और तुअर की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जाएगी। इसके लिए किसानों का पंजीयन 20 फरवरी से शुरू हो चुका है और 16 मार्च तक चलेगा, जबकि खरीदी 24 मार्च से 30 मई के बीच की जाएगी। इससे बड़ी संख्या में किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस का ऐलान।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उड़द की फसल को प्रोत्साहित करने के लिए 600 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस भी दिया जाएगा। इससे किसानों को बेहतर आय मिलेगी और प्रदेश में दलहन उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। सीएम डॉक्टर मोहन यादव ने विधानसभा में सोमवार को किसान कल्याण एवं कृषि पर वक्तव्य में यह बातें बताई है l

केंद्र को भेजा प्रस्ताव, अधिक खरीदी की तैयारी।
राज्य सरकार ने केंद्र को दलहन खरीदी के लिए प्रस्ताव भेजा है, ताकि अधिक से अधिक मात्रा में फसल खरीदी जा सके। उन्होंने कहा नाफेड, एनसीसीएफ अपने स्तर पर 1.31 लाख मैट्रिक टन तुअर खरीद सके इसके लिए प्रस्ताव भेजा जा रहा है, 6.86 लाख सोयाबीन किसानों को भावांतर योजना के तहत 1454 करोड़ की राशि दी l पहली बार सरसों को भी योजना में शामिल करेंगे l केंद्र ने  एमएसपी 6200 रुपए तय किया है l सरकार चाहती है किसानों को कोई  परेशानी ना हो इसके लिए भावांतर  के दायरे में लेंगे । मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुगम बनाई जा रही है।

कृषि योजनाओं से मजबूत होगी किसानों की आय।
सरकार का दावा है कि भावांतर और एमएसपी जैसी योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे प्रदेश में कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।

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