कैसी हो आपकी दिनचर्या जिससे सेहत की हो सुरक्षा:

khabar pradhan

संवाददाता

7 April 2026

अपडेटेड: 5:35 PM 0thGMT+0530

कैसी हो आपकी दिनचर्या जिससे सेहत की हो सुरक्षा:


7 अप्रैल 2026
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में देर राते तक जागना, जंक फास्ट फूड खाना, सोने जागने का कोई तय समय न होना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी… कुल मिलाकर रहन-सहन और खानपान का जो यह सिस्टम बिगड़ चुका है, उसे लोग मॉडर्न लाइफस्टाइल का नाम दे रहे हैं।

लेकिन आज जितनी तेजी से परिवारों में बीमारियों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है, उसकी जड़ आधुनिक लाइफस्टाइल है… इन खराब आदतों का असर सेहत पर तुरंत नजर नहीं आता, लेकिन कुछ समय बाद यही आदतें गंभीर बीमारियों की वजह बन जाती हैं। डायबिटीज, हार्ट डिजीज, मोटापा, कैंसर, फैटी लिवर और मानसिक समस्याओं जैसी बीमारियों का सबसे बड़ा कारण खराब लाइफस्टाइल है।
इन बीमारियों से बचने का एक तरीका यह है कि हम अपनी जीवनशैली को सुधारें…

1. रोज सुबह की धूप लें:

सुबह की हल्की धूप शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन-डी प्रदान करती है। सुबह 7-9 बजे की धूप में बैठना फायदेमंद है। विटामिन-डी हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों की मजबूती के लिए आवश्यक है। मानसिक शक्ति बढ़ाने में भी मदद करता है।

सुबह 15 से 20 मिनट धूप में रहना शरीर की जैविक घड़ी को संतुलित करता है और इम्यून सिस्टम को मजबूती मिलती है। धूष से मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ता है और तनाव कम करने में मदद मिलती है।
यदि आप हल्का तेल की मालिश करके धूप में बैठते हैं तो इससे आपकी विटामिन-डी की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।

ये लोग दें खास ध्यानः जो लोग ऑफिस या घर के अंदर अधिक समय बिताते हैं, उन्हें नियमित धूप में बैठने की आदत को आज से ही अपना लेना चाहिए, नहीं तो समस्याएं बढ़ने लगेंगी।

2. पर्याप्त पानी पीएं:

शरीर के सभी अंगों के सही कार्य के लिए पर्याप्त पानी जरूरी है।
हाइड्रेट रहने के लिए प्रतिदिन कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। गर्मियों में नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ पीना भी हाइडेशन को बनाए रखने में लाभकारी है।

पर्याप्त पानी किडनी को स्वस्थ रखने और शरीर से विषैले तत्त्व बाहर निकालने में मदद करता है।
पर्याप्त पानी पीने से एजिंग की समस्या भी कम हो सकती है। # कम पानी से थकान, सिरदर्द, पाचन संबंधी समस्याएं और किडनी स्ट्रेस का जोखिम बढ़ सकता है।
हर दो घंटे में पानी पीने की आदत लाभकारी है।
मोबाइल रिमाइंडर लगाकर पानी पीना याद रखा जा सकता है।
मौसम और शारीरिक गतिविधि के अनुसार पानी की मात्रा बढ़ानी चाहिए। कुछ बीमारियों में पानी की मात्रा सीमित रखनी होती है।

3.  20 मिनट में स्क्रीन ब्रेक:

लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में जलन, ड्राइनेस, ब्लर विजन, सिरदर्द, रोशनी से चुभन और पास-दूर की चीजों पर फोकस करने में दिक्कत आदि समस्याएं होने लगती हैं।
20-20-20 नियम अपनाएं। हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें। साथ ही हैल्दी खानपान का भी ध्यान रखें।

4. पर्याप्त नींद लें:

7 से 8 घंटे की नींद शरीर के लिए आवश्यक है।
जब हम सोते हैं तो शरीर कई जरूरी काम करता है, जैसे मांसपेशियों की मरम्मत, दिमाग को आराम एवं हार्मोन का संतुलन।
हर दिन निश्चित समय पर सोने और उठने की आदत डालें।
नींद की कमी से मोटापा, तनाव आदि समस्याएं हो सकती हैं।

5.. तनाव न लें, ध्यान-प्राणायाम करें

डिजिटल डिटॉक्स अपनाएंः आज तनाव का बड़ा कारण स्क्रीन टाइम है। सोने से एक घंटा पहले और सुबह उठने के एक घंटे बाद तक मोबाइल से दूरी रखें। सोशल मीडिया उपयोग की समय सीमा तय करें और ऐसे अकाउंट्स हटाएं जो तनाव या हीन भावना बढ़ाते हों। अनावश्यक ऐप्स के नोटिफिकेशन बंद रखें।.

प्राणायाम और गहरी सांस लेंः तनाव महसूस होने पर 5-10 बार गहरी और लंबी सांस लें। पूरा ध्यान सांसों पर केंद्रित करें। इससे मन शांत होता है और नर्वस सिस्टम संतुलित रहता है। ध्यान को दिनचर्या में शामिल करें।

6. रोज 30 मिनट चलें रोज सिर्फ 30 मिनट चलन काफी है। फिट रहने के लिए बहुत बड़े बदलाव की नहीं बल्कि नियमित छोटी आदतों को अपनाने की जरूरत होती है।
नियमित वॉक करने से हार्ट डिजीज का खतरा कम होता है और हृदय बेहतर तरीके से काम करता है।
रोजाना चलना टाइप-2 डायबीटिज के जोखिम को कम करने और ब्लड शुगर संतुलित रखने में मदद करता है। साथ ही नियमित वाँक कैलोरी बर्न करती है और मोटापा बढ़ने से रोकती है।

येचलने से तनाव कम होता है, मूड बेहतर होता है और मानसिक ताजगी बनी रहती है। साथ ही नींद की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़‌ती है।

ऐसे निकालें समयः ऑफिस में हर घंटे 5-10 मिनट उठकर चलें। लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का प्रयोग करें और फोन पर बात करते हुए टहलें। घर पर सुबह, दोपहर और रात में तीन बार 10-10 मिनट के हिस्सों में भी वॉक करने से समान लाभ मिलते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी है नियमितता। इसलिए रोजाना चलना ही फायदेमंद होगा।

7. थाली में रखें संतुलन:

आधी प्लेट फल और सब्जियों से भरेंः प्लेट का लगभग आधा हिस्सा मौसमी फल और हरी सब्जियों के लिए रखें। इनमें मौजूद पोषक तत्त्व इम्युनिटी बढ़ाते हैं।

* थाली बनाएं रंग-बिरंगीः प्लेट में जितने अधिक प्राकृतिक रंग शामिल होंगे, उतने ही पोषक तत्त्व मिलेंगे। हरी, लाल, पीली, नारंगी सब्जियां एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत हैं।

एक चौथाई भाग में प्रोटीन जरूर रखेंः थाली के लगभग

1/4 हिस्से में प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे दही, दूध, पनीर, दाल, चना, राजमा या अंकुरित अनाज शामिल करें। इससे मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत बनेंगी।

मोटे अनाज को प्राथमिकता दें: गेहूं के साथ-साथ ज्वार,बाजरा, रागी और अन्य मोटे अनाजों को भोजन में शामिल करें। ये पाचन को बेहतर बनाते हैं।

नमक-चीनी का सेवन कम करें: मैदा, अधिक नमक और चीनी का सेवन कम करें। पैकेज्ड फूड से दूर रहें।

8. हैल्थ चेकअप कराएं

प्लांट-बेस्ड फूड खाएं: पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थ जैसे दालें, बीन्स, मेवे, बीज और हरी सब्जियां बेहतरीन प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स का स्रोत हैं।

कई बीमारियां शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं देतीं, इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद महत्त्वपूर्ण है। साल में कम से कम एक बार बेसिक हैल्थ चेकअप करवाएं।

40 वर्ष की आयु के बाद ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल, किडनी और लिवर फंक्शन जैसी जांच नियमित रूप से करानी चाहिए। परिवार में यदि डायबिटीज, हृदय रोग या थायरॉइड की समस्या का इतिहास है तो डॉक्टर की सलाह से जांच और अधिक जरूरी हो जाती है।

समय पर जांच कराने से बीमारी की पहचान शुरुआती स्तर पर हो सकती है, जिससे इलाज आसान और प्रभावी बनता है। कई लोग लक्षण न होने पर जांच को टाल देते हैं, जबकि यही लापरवाही बाद में गंभीरता बढ़ा सकती है।

सामाजिक रूप से जुड़े रहें: अकेलापन तनाव बढ़ाता है। परिवार, मित्रों और परिचितों से नियमित बातचीत करें। संदेश भेजने के बजाय कभी-कभी फोन पर बात करें।
तनाव या चिंता को भीतर न रखें भरोसेमंद लोगों से अपनी भावनाऐ  साझा  करें।

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