क्या योगी सरकार से नाराज है यूपी के ब्राह्मण विधायक: क्या तख्ता पलट की है तैयारी
संवाददाता
30 December 2025
अपडेटेड: 4:30 PM 0thGMT+0530
यूपी में एक तरफ ठंड का सितम है तो दूसरी तरफ सियासत गर्म है….यहां लोग मानकर चल रहे हैं कि तीसरे टर्म के लिए योगी की कुर्सी फिक्स है लेकिन अखिलेश यादव हैं कि मानते नहीं…सपा की रणनीति आने वाले चुनावों के लेकर क्या हो सकती है।
लखनऊ की कोहरे वाली ठंडी सुबह में सियासत उस वक्त अचानक गरमा गई, जब कुशीनगर से भाजपा विधायक पंचानंद पाठक के आवास पर करीब 40 ब्राह्मण विधायक और एमएलसी एक साथ जुट गए… विधानसभा सत्र के बीच हुई इस गुप्तनुमा बैठक ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है… बाहर से इसे एक सामाजिक और पारिवारिक भोज बताया जा रहा है, लेकिन अंदरखाने हुई चर्चाओं ने नए राजनीतिक समीकरणों के संकेत दे दिए हैं… अब खास बात ये रही कि इस बैठक में सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि अन्य दलों के भी कई ब्राह्मण विधायक शामिल हुए… यही वजह है कि इसे महज एक सामान्य मुलाकात मानने को विपक्ष तैयार नहीं है…बताया जा रहा है कि बैठक में ब्राह्मण समाज की एकजुटता, हालिया राजनीतिक विवादों और अलग-अलग दलों द्वारा ब्राह्मणों को निशाना बनाए जाने जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई… कई विधायकों ने ये बात भी उठाई कि भाजपा को मिली बड़ी चुनावी जीतों में ब्राह्मण समाज की भूमिका अहम रही है, लेकिन संगठन और सरकार में उन्हें अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला…इस बैठक में रत्नाकर मिश्रा, शलभ मणि त्रिपाठी, ऋषि त्रिपाठी, प्रेमनारायण पांडेय, प्रकाश द्विवेदी, रमेश मिश्रा, अंकुर राज तिवारी, विनय द्विवेदी और एमएलसी साकेत मिश्रा जैसे कई बड़े नाम मौजूद थे… अधिकांश जनप्रतिनिधि पूर्वांचल और बुंदेलखंड से जुड़े बताए जा रहे हैं… वहीं आयोजक विधायक पंचानंद पाठक ने सभी राजनीतिक अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि यह केवल एक पारिवारिक भोज था और राजनीति से इसका कोई लेना-देना नहीं है…. उनके मुताबिक, बातचीत सामान्य सामाजिक और आपसी सहयोग के मुद्दों तक सीमित रही…लेकिन विपक्ष ने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया… सपा महासचिव शिवपाल यादव ने भाजपा विधायकों को खुलेआम समाजवादी पार्टी में आने का न्योता दे दिया… वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए इस बैठक को लेकर सवाल खड़े किए…तो कुल मिलाकर, जातिगत बैठकों के दौर में हुई ये मुलाकात उत्तर प्रदेश की राजनीति को एक नया मोड़ दे सकती है… अब देखना होगा कि इसे सरकार और संगठन कैसे पढ़ते हैं और इसका असर आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है…