गरीबों का नहीं केवल अमीरों का हो रहा विकास….राज्यसभा में मोदी सरकार पर बरसे खरगे
संवाददाता
28 February 2025
अपडेटेड: 1:47 AM 0thGMT+0530
कांग्रेस ने एक बार फिर कसा बीजेपी पर तंज
नई दिल्ली! कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘विकसित भारत’ दृष्टिकोण आम लोगों की जेबे ही खाली कर रहा है और चुनिंदा अरबपतियों की तिजोरियां ही भर रहा है। उन्होंने कहा है कि भारत एक वैश्विक कर युद्ध और व्यापार बाधाओं का सामना भी कर रहा है।
कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को दावा भी किया है कि सौ करोड़ भारतीयों के पास कोई अतिरिक्त समय आय नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘विकसित भारत’ दृष्टिकोण आम लोगों की जेबें ही खाली कर रहा है और चुनिंदा अरबपतियों का खजाना भी भर रहा है। खरगे ने कहा है कि भारत एक वैश्विक कर (टैरिफ) युद्ध और व्यापार में बाधाओं का सामना भी कर रहा है और केंद्रीय बजट में की गईं घोषणाएं ‘निराशाजनक’ साबित भी हुई हैं।
‘दैनिक जरूरतों को पूरा करने में लोग भी असमर्थ’
राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में भी कहा है कि ‘नरेंद्र मोदी जी, सौ करोड़ भारतीयों के पास खर्च करने के लिए कोई अतिरिक्त आय भी नहीं है…. हमारे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 60 फीसदी उपभोग पर भी निर्भर है। लेकिन भारत के केवल 10 फीसदी लोग आर्थिक विकास और उपभोग को बढ़ावा भी देते हैं और 90 फीसदी लोग बुनियादी दैनिक जरूरतों को पूरा भी करने में असमर्थ हैं।
‘मध्य वर्गीय करदाताओं के वेतन में नहीं हुई है वृद्धि
उन्होंने आगे कहा है, भारत की 50 फीसदी मध्य वर्गीय करदाताओं ने पिछले दशक में वेतन में वृद्धि नहीं देखी गई है। ग्रामीण मजदूरी नकारात्मक वृद्धि का सामना भी कर रहा है। पैसा कुछ ही लोग एकत्र कर रहे हैं और आपकी नीतियां सभी लोगों के बीच आय वितरित करने में विफल भी रही है।
100 साल के उच्चतम स्तर पर भी आय असमानता
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा भी किया है कि बीते दस वर्षों में स्थिर वेतन, लगातार महंगाई और घटते उपभोग के कारण घरेलू बचत 50 साल के निचले स्तर पर भी पहुंच गई है। आय असमानता 100 साल के उच्चतम स्तर पर ही है और घरेलू ऋण सर्वकालिक उच्च स्तर पर है।
युवाओं के लिए अससहनीय भी हो गई बेरोजगारी
खरगे ने कहा है, हम एक वैश्विक कर (टैरिफ) युद्ध और व्यापार बाधाओं का सामना भी कर रहे हैं। बेरोजगारी हमारे युवाओं के लिए असहनीय भी हो गई है। बजट में की गईं घोषणाएं निराशजनक भी साबित हुईं। आपका विकसित भारत का दृष्टिकोण आम भारतीयों की जेबे भी खाली कर रहा है और चुनिंदा अरबपतियों की तिजोरियां भी भर रहा है।