चारधाम यात्रा में इस बार आई 30% की गिरावट, अब फिर से रफ्तार पकड़ रही है यात्रा

khabar pradhan

संवाददाता

19 May 2025

अपडेटेड: 6:48 AM 0thGMT+0530

चारधाम यात्रा में इस बार आई 30% की गिरावट, अब फिर से रफ्तार पकड़ रही है यात्रा

चारधाम यात्रा में इस बार आई 30% की गिरावट, अब फिर से रफ्तार पकड़ रही है यात्रा

30 अप्रैल से शुरू हुई चारधाम यात्रा में इस बार अब तक 6 लाख 62 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं. हालांकि, यह संख्या पिछले साल की तुलना में लगभग 30% कम है. 2023 में 13 दिन के भीतर करीब 8 लाख 85 हजार श्रद्धालु चारधाम पहुंचे थे. इस बार शुरूआती कमी का मुख्य कारण भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव को माना जा रहा है, जिसने लोगों के यात्रा करने के निर्णय को प्रभावित किया.
हालांकि, अब स्थिति सामान्य हो रही है और भारत-पाक संबंधों में तनाव में भी कमी आई है, जिससे यात्रा में दोबारा तेजी देखी जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में यात्रियों की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है.

रजिस्ट्रेशन में तेजी, अब तक 27 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण
चारधाम यात्रा के लिए अब तक 27 लाख 74 हजार से ज्यादा तीर्थयात्रियों ने पंजीकरण करा लिया है, जो इस बात का संकेत है कि यात्रा फिर से गति पकड़ रही है. मई और जून के महीनों में यात्रा का मौसम सबसे अनुकूल रहता है. यही वो समय होता है जब स्कूलों की छुट्टियां होती हैं और देशभर से श्रद्धालु परिवार सहित उत्तराखंड का रुख करते हैं.
पिछले वर्षों के आंकड़े भी यही दर्शाते हैं कि चारधाम यात्रा का सबसे अधिक दबाव मई-जून में ही होता है. श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी के चलते स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग ने व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत किया है, ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो.

सुरक्षा और सुविधा का पूरा इंतजाम, पहली बार आधार बेस पंजीकरण की शुरुआत
उत्तराखंड पर्यटन विभाग और राज्य सरकार ने चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं. पर्यटन सचिव सचिन कुर्वे ने जानकारी दी कि इस बार यात्रा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है. सभी रूटों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है, मेडिकल सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं और रियल टाइम निगरानी भी की जा रही है.
इस बार की यात्रा में एक नई पहल के तहत आधार बेस पंजीकरण की शुरुआत की गई है. इसका उद्देश्य यात्रियों को फर्जी या अनावश्यक रजिस्ट्रेशन से बचाना है और उन्हें ज्यादा सुविधाएं देना है. इस डिजिटल व्यवस्था से श्रद्धालु आसानी से अपने रूट और टाइम स्लॉट के अनुसार यात्रा कर पा रहे हैं.

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