चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के बयान को बताया गलत

khabar pradhan

संवाददाता

22 April 2025

अपडेटेड: 1:37 PM 0ndGMT+0530

कहा- भ्रामक सूचना फैलाना कानून का अपमान, पार्टी की छवि को भी नुकसान

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया बयान पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे गलत और भ्रामक करार दिया है। आयोग ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा फैलाई जा रही गलत सूचना न केवल कानून का अपमान है, बल्कि यह उनकी अपनी पार्टी और इसके प्रतिनिधियों की छवि को भी बदनाम करती है। यह बयान राहुल गांधी के उस दावे के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने विदेश में भारतीय चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए थे।
मामले का विवरण
राहुल गांधी ने हाल ही में अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में मतदाता सूची और मतदान प्रतिशत को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में मतदान के बाद मतदाता प्रतिशत में असामान्य वृद्धि हुई, जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह पैदा होता है। इस बयान के बाद भाजपा ने इसे भारत की छवि को वैश्विक मंच पर खराब करने का प्रयास बताया और चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की।
चुनाव आयोग ने अपने जवाब में राहुल गांधी के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र चुनाव में मतदाता सूची और मतदान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी। आयोग ने अपने बयान में कहा, “राहुल गांधी का दावा तथ्यहीन और काल्पनिक है। मतदान के आंकड़ों में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई। केवल 89 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनका समाधान नियमानुसार किया गया।”
चुनाव आयोग की चेतावनी
आयोग ने राहुल गांधी को चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की गलत सूचना फैलाना न केवल चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को कमजोर करता है, बल्कि यह कानून का भी अपमान है। आयोग ने यह भी जोड़ा कि ऐसे बयान कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधियों की साख को नुकसान पहुंचाते हैं, जो चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे तथ्यों के आधार पर ही बयान दें और अनावश्यक विवादों से बचें।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस मामले ने राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। भाजपा ने आयोग के रुख का स्वागत करते हुए राहुल गांधी पर देश की छवि खराब करने का आरोप लगाया। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “राहुल गांधी विदेशी धरती पर भारत की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। यह उनकी हताशा को दर्शाता है।”
वहीं, कांग्रेस ने आयोग के बयान पर आपत्ति जताई है। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “चुनाव आयोग को तटस्थ रहना चाहिए। राहुल गांधी ने केवल पारदर्शिता की मांग की थी, जिसे गलत ढंग से पेश किया जा रहा है।” कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी X पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आयोग को भाजपा नेताओं के बयानों पर भी समान कठोरता दिखानी चाहिए।
सोशल मीडिया पर चर्चा
X पर इस मुद्दे ने व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। कई यूजर्स ने राहुल गांधी के बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताया, जबकि कुछ ने उनके सवालों को जायज ठहराया। एक यूजर ने लिखा, “चुनाव आयोग का जवाब सटीक है। बिना सबूत के ऐसे दावे करना गलत है।” दूसरी ओर, एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “राहुल गांधी ने जो सवाल उठाए, वे जनता के हित में हैं। आयोग को जवाब देने के बजाय जांच करनी चाहिए।”
पिछले विवाद
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी के बयानों पर चुनाव आयोग ने आपत्ति जताई है। 2024 में भी आयोग ने राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी भाषणों पर नोटिस जारी किया था, जिसमें दोनों नेताओं से अपने बयानों पर स्पष्टीकरण मांगा गया था। इस बार, आयोग ने राहुल के बयान को “बेतुका” करार देते हुए और सख्त रुख अपनाया है।
आगे की दिशा
चुनाव आयोग ने फिलहाल राहुल गांधी के खिलाफ किसी औपचारिक कार्रवाई की घोषणा नहीं की है, लेकिन उसने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस तरह के बयानों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। यह मामला राजनीतिक तौर पर और गर्म होने की संभावना है, क्योंकि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही इसे अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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