दिल्ली हाईकोर्ट की रामदेव को फटकार:
संवाददाता
22 April 2025
अपडेटेड: 12:31 PM 0ndGMT+0530

शरबत जिहाद’ बयान पर सख्त नाराजगी, सभी वीडियो हटाने का आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने योग गुरु रामदेव के ‘शरबत जिहाद’ वाले बयान पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे अस्वीकार्य और आपत्तिजनक करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह बयान माफी के लायक नहीं है और इसने अदालत की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। हाईकोर्ट ने रामदेव को अपने विचार व्यक्तिगत रूप से अपने तक सीमित रखने की सलाह दी और उनके द्वारा इस बयान से संबंधित सभी वीडियो और सामग्री को तत्काल हटाने का निर्देश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला तब शुरू हुआ जब रामदेव ने एक सार्वजनिक मंच पर ‘शरबत जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कुछ समुदायों पर विवादास्पद टिप्पणी की। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद कई संगठनों और व्यक्तियों ने इसे आपत्तिजनक और सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने वाला बताया। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसमें रामदेव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।
कोर्ट की टिप्पणी
न्यायमूर्ति के नेतृत्व वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान रामदेव के बयान को ‘पूरी तरह से अनुचित’ करार दिया। कोर्ट ने कहा, “ऐसे बयान समाज में नफरत और विभाजन को बढ़ावा देते हैं। यह न केवल असंवेदनशील है, बल्कि देश के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने वाला है।” कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक हस्तियों को अपनी बात कहने में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि उनके शब्दों का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
कोर्ट ने रामदेव से पूछा कि क्या वे इस बयान के लिए माफी मांगना चाहेंगे, लेकिन साथ ही कहा कि यह बयान इतना गंभीर है कि इसे माफ करना संभव नहीं है। कोर्ट ने रामदेव को निर्देश दिया कि वे तत्काल प्रभाव से इस बयान से संबंधित सभी वीडियो, पोस्ट और अन्य सामग्री को सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म से हटाएं।
रामदेव का जवाब
सुनवाई के दौरान रामदेव के वकील ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि उनके मुवक्किल इस बयान से संबंधित सभी वीडियो और सामग्री को हटा देंगे। रामदेव ने कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर कहा कि उनका इरादा किसी समुदाय या व्यक्ति को ठेस पहुंचाने का नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि वे भविष्य में ऐसी टिप्पणियों से बचेंगे।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस मामले ने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। X पर कई यूजर्स ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया, जबकि कुछ ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश के रूप में देखा। एक यूजर ने लिखा, “रामदेव जैसे प्रभावशाली लोगों को अपने शब्दों का चयन सावधानी से करना चाहिए। कोर्ट का फैसला सही है।” वहीं, कुछ अन्य यूजर्स ने रामदेव का बचाव करते हुए कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया।
कई राजनीतिक नेताओं ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस और आप जैसी विपक्षी पार्टियों ने कोर्ट के फैसले की सराहना की, जबकि कुछ भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है।
आगे की कार्रवाई
हाईकोर्ट ने रामदेव को अपने वादे के अनुरूप सभी वीडियो हटाने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह इस मामले की अगली सुनवाई में अनुपालन की स्थिति की समीक्षा करेगा। यदि रामदेव कोर्ट के निर्देशों का पालन करने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
निष्कर्ष
यह मामला एक बार फिर सार्वजनिक हस्तियों की जिम्मेदारी और उनके बयानों के सामाजिक प्रभाव को रेखांकित करता है। दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल रामदेव के लिए, बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो अपने शब्दों के माध्यम से समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश करते हैं।