धर्म परिवर्तन के बाद नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ: SC दर्जे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
संवाददाता
25 March 2026
अपडेटेड: 3:44 PM 0thGMT+0530
25 मार्च 2026
नई दिल्ली। Supreme Court of India ने अनुसूचित जाति (SC) के दर्जे को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को एससी का दर्जा नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि संविधान और कानून के अनुसार यह लाभ केवल निर्धारित धार्मिक दायरे में ही मान्य है।
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी पसंद से धर्म बदल सकता है, लेकिन इससे उसे अनुसूचित जाति के तहत मिलने वाले आरक्षण और अन्य संवैधानिक लाभ स्वतः नहीं मिल सकते। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि एससी का दर्जा ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव के आधार पर तय किया गया है, जो विशेष रूप से हिंदू, सिख और बौद्ध समुदायों के संदर्भ में मान्य है।
इस मामले में याचिकाकर्ता ने धर्म परिवर्तन के बाद भी एससी दर्जा और उससे जुड़े लाभ बनाए रखने की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए साफ किया कि मौजूदा कानूनी व्यवस्था में ऐसा संभव नहीं है।
कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि अगर कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति में जन्म लेने के बाद धर्म परिवर्तन करता है, तो वह उस श्रेणी के तहत मिलने वाले लाभों का दावा नहीं कर सकता।
इससे पहले Madhya Pradesh High Court भी इसी तरह का निर्णय दे चुका है, जिसमें कहा गया था कि धर्म परिवर्तन के बाद एससी का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला आरक्षण से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा और भविष्य में ऐसे विवादों के निपटारे में मार्गदर्शक साबित होगा।