नासिक की IT कंपनी में ‘कॉरपोरेट जिहाद’: दबाव डालकर 8 महिला कर्मचारियों को बनाया मुसलमान.

khabar pradhan

संवाददाता

10 April 2026

अपडेटेड: 3:16 PM 0thGMT+0530

नासिक की IT कंपनी में ‘कॉरपोरेट जिहाद’: दबाव डालकर 8 महिला कर्मचारियों को बनाया मुसलमान.

10 अप्रैल 2026
मुंबई / नासिक:
महाराष्ट्र के नासिक में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ एक आईटी कंपनी के भीतर महिला कर्मचारियों के यौन शोषण और जबरन धर्म परिवर्तन (धर्मांतरण) का खेल चल रहा था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे ‘कॉरपोरेट जिहाद’ का नाम दिया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने मामले की गहराई से जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है।
क्या है पूरा मामला
नासिक की एक आईटी कंपनी में काम करने वाली महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि पिछले चार सालों से कंपनी के कुछ सीनियर कर्मचारी (टीम लीड्स) उन पर यौन शोषण और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव बना रहे थे। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें ऑफिस में गोमांस खाने, नमाज पढ़ने और रमजान के दौरान रोजा रखने के लिए मजबूर किया गया। इतना ही नहीं, उनके धार्मिक प्रतीकों का अपमान भी किया गया।
परिजनों के शक से खुला राज
यह मामला तब सामने आया जब पीड़ित महिला कर्मचारियों के पहनावे और व्यवहार में अचानक बदलाव दिखने लगा। जब परिजनों ने गौर किया कि लड़कियां घर में अलग तरह से व्यवहार कर रही हैं और ऑफिस के प्रभाव में आकर अपना धर्म बदल रही हैं, तब पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस के मुताबिक, अब तक 8 महिलाओं और 1 पुरुष कर्मचारी को जबरन इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किए जाने की बात सामने आई है।
एचआर मैनेजर समेत 7 लोग गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 6 टीम लीडर्स और कंपनी की एक महिला एचआर मैनेजर अश्विनी छनानी शामिल हैं। आरोप है कि जब महिला कर्मचारियों ने इस शोषण की शिकायत एचआर से की, तो आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय एचआर मैनेजर ने पीड़ित महिलाओं को ही चुप रहने और मुंह बंद रखने की धमकी दी।
गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों के नाम आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाह रुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तार और दानिश शेख बताए जा रहे हैं।
एसआईटी करेगी जांच
नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के निर्देश पर डीसीपी संदीप मिटके के नेतृत्व में एसआईटी की टीम बनाई गई है। इस टीम में साइबर विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह कुछ लोगों की व्यक्तिगत करतूत है या कंपनी के भीतर कोई बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा है।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस धर्मांतरण के पीछे कोई विदेशी फंडिंग या कोई बड़ा गिरोह तो शामिल नहीं है। इस घटना के बाद से कॉरपोरेट जगत में सुरक्षा और कार्यस्थल के माहौल को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

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