निजी स्कूलों में किताबों की मनमानी कीमतें, प्रशासन ने शुरू किया जांच अभियान
संवाददाता
7 March 2026
अपडेटेड: 12:55 PM 0thGMT+0530
7 मार्च 2026
भोपाल। शहर के कई निजी स्कूलों में किताबों की कीमतों को लेकर अभिभावकों की शिकायतों के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि स्कूलों द्वारा एनसीईआरटी की किताबों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, एनसीईआरटी की किताब जहां लगभग 65 रुपये में मिलती है, वहीं उसी विषय की निजी प्रकाशक की किताब 430 रुपये तक बेची जा रही है, जो करीब छह गुना ज्यादा कीमत है। एनसीईआरटी के नियम के बाद दूकानों से किताबें गायब हैं । दुकानों की गोदाम में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें भरी हुई है, जिनके दम 6 गुना ज्यादा है । स्कूल शिक्षा विभाग ने हर कक्षा के लिए एनसीईआरटी की किताबों को अनिवार्य किया है लेकिन दुकानों पर यह नहीं पहुंची ।
जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच अभियान शुरू किया है। अधिकारियों का कहना है कि नियमों के अनुसार स्कूलों को छात्रों पर किसी विशेष दुकान या प्रकाशक से किताबें खरीदने का दबाव नहीं बनाना चाहिए। अभिभावकों ने शुक्रवार को जिला शिक्षा कार्यालय का घेराव किया । शिक्षा विभाग एनसीईआरटी के नियम अब तक लागू नहीं कर सका है जिसका स्कूल फायदा उठा रहे हैं, इस दौरान पलक महासंघ के पदाधिकारी भी मौजूद थे।
बताया गया कि एनसीईआरटी की 6 किताबों का सेट लगभग 390 रुपये में मिल जाता है, जबकि निजी प्रकाशकों की किताबों के कारण अभिभावकों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
अभिभावकों ने मांग की है कि प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करे और स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें ही लागू करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि शिक्षा का खर्च कम किया जा सके। जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र अहिरवार ने बताया, प्राइवेट स्कूल अभिभावकों से किताबें और फीस की मनमानी न कर सके इसके लिए जांच हो रही है । अभिभावकों की शिकायत पर मामले में कार्रवाई होगी ।