पश्चिमी मध्य प्रदेश में शराब सिंडिकेट का बोलबाला
संवाददाता
22 April 2025
अपडेटेड: 1:42 PM 0ndGMT+0530

विक्रांत भूरिया का बड़ा बयान: आदिवासी क्षेत्रों में महुए के अलावा अन्य शराब पर प्रतिबंध लगे
मध्य प्रदेश के झाबुआ से कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने आदिवासी क्षेत्रों में शराब की अवैध बिक्री और तस्करी को लेकर सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने मांग की है कि आदिवासी क्षेत्रों में पारंपरिक महुआ शराब को छोड़कर अन्य सभी प्रकार की शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए। भूरिया ने पश्चिमी मध्य प्रदेश में शराब माफिया के एक बड़े सिंडिकेट के सक्रिय होने का दावा किया, जो मध्य प्रदेश से गुजरात तक अवैध शराब की तस्करी में लिप्त है। यह बयान उन्होंने झाबुआ में एक जनसभा के दौरान दिया।
शराब सिंडिकेट का खुलासा
विक्रांत भूरिया ने कहा, “पश्चिमी मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में शराब माफिया का जाल फैला हुआ है। झाबुआ, रतलाम, धार और अलीराजपुर जैसे जिलों में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। यह शराब मध्य प्रदेश से गुजरात तक तस्करी के लिए सप्लाई की जा रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस सिंडिकेट को स्थानीय प्रशासन और कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण यह गोरखधंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा।
भूरिया ने कहा कि आदिवासी समुदाय में महुआ शराब एक सांस्कृतिक और पारंपरिक पेय है, जिसे घरेलू स्तर पर बनाया जाता है। लेकिन बाहरी शराब, खासकर नकली और जहरीली शराब, आदिवासी युवाओं को बर्बाद कर रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार महुआ को छोड़कर अन्य सभी शराबों पर सख्त प्रतिबंध लगाए और तस्करी पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाए।
आदिवासी क्षेत्रों में शराब का दुष्प्रभाव
भूरिया ने आदिवासी क्षेत्रों में शराब की लत को सामाजिक और आर्थिक बर्बादी का प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा, “हमारे युवा शराब की लत में पड़कर अपनी जिंदगी और परिवार को बर्बाद कर रहे हैं। नकली शराब की बिक्री से कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। यह समय है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से कदम उठाए।” उन्होंने यह भी कहा कि शराब माफिया के कारण आदिवासी क्षेत्रों में अपराध बढ़ रहे हैं, जिससे सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है।
गुजरात में तस्करी का दावा
भूरिया ने दावा किया कि मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में अवैध शराब गुजरात भेजी जा रही है, जहां शराबबंदी लागू है। उन्होंने कहा, “गुजरात में शराबबंदी के बावजूद वहां शराब आसानी से उपलब्ध है, और इसका बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश से सप्लाई होता है। इस तस्करी में बड़े-बड़े माफिया शामिल हैं, जिनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही।”
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
भूरिया के बयान ने मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की योजना बनाई है। पार्टी के प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने कहा, “भूरिया ने एक गंभीर मुद्दा उठाया है। BJP सरकार शराब माफिया को संरक्षण दे रही है, जिसके कारण आदिवासी क्षेत्रों में सामाजिक समस्याएं बढ़ रही हैं। हम इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे।”
वहीं, BJP ने भूरिया के आरोपों को खारिज किया है। झाबुआ के BJP नेता ने कहा, “कांग्रेस बेवजह सनसनी फैलाने की कोशिश कर रही है। मध्य प्रदेश सरकार अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। भूरिया के पास अगर कोई सबूत है, तो उसे सामने लाएं।”
सोशल मीडिया पर चर्चा
X पर भूरिया के बयान ने व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। कई यूजर्स ने उनके बयान का समर्थन करते हुए लिखा, “आदिवासी क्षेत्रों में शराब माफिया का आतंक खत्म होना चाहिए। भूरिया ने सही मुद्दा उठाया।” एक यूजर ने टिप्पणी की, “महुआ हमारी संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन नकली शराब ने आदिवासियों को बर्बाद कर दिया। सरकार को सख्ती करनी चाहिए।” हालांकि, कुछ यूजर्स ने इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया और कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को वोट बैंक के लिए भुना रही है।
सरकार और प्रशासन की कार्रवाई
मध्य प्रदेश सरकार ने हाल के वर्षों में अवैध शराब के खिलाफ कई अभियान चलाए हैं। 2024 में झाबुआ और अलीराजपुर में जहरीली शराब से कई लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाई थी। इसके बावजूद, भूरिया का दावा है कि शराब माफिया का नेटवर्क अब भी सक्रिय है। उन्होंने मांग की है कि सरकार एक विशेष टास्क फोर्स बनाए, जो शराब तस्करी और माफिया के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करे।
आगे की दिशा
विक्रांत भूरिया का यह बयान मध्य प्रदेश और गुजरात की सरकारों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। आदिवासी क्षेत्रों में शराब की लत और तस्करी एक गंभीर सामाजिक मुद्दा है, जिस पर लंबे समय से चर्चा होती रही है। भूरिया के आरोपों के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और क्या शराब माफिया के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई होती है।