पश्चिम एशिया तनाव के बीच ट्रंप–मोदी की पहली बातचीत, हालात पर की चर्चा

khabar pradhan

संवाददाता

25 March 2026

अपडेटेड: 3:41 PM 0thGMT+0530

पश्चिम एशिया तनाव के बीच ट्रंप–मोदी की पहली बातचीत, हालात पर की चर्चा

25 मार्च 2026
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट पर सक्रिय कूटनीति
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता तेज हो गई है। इसी क्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने क्षेत्र में जारी संघर्ष, शांति प्रयासों और वैश्विक स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।

प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के बाद बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी सार्थक चर्चा हुई, जिसमें पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं और वे इस विषय पर संपर्क में बने रहेंगे। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित और खुला बनाए रखने पर भी जोर दिया गया, ताकि वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति प्रभावित न हो।

इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम एशिया और अन्य देशों के कई प्रमुख नेताओं से बातचीत कर चुके हैं। इनमें ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (दो बार), इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक, जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय, बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा, कुवैत के अमीर शेख मिशाल अल अहमद अल जाबेर अल सबाह, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, इन सभी वार्ताओं में भारत ने स्पष्ट रूप से संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने हर नेता से क्षेत्रीय तनाव को कम करने, शांति बहाल करने और किसी भी तरह की व्यापक टकराव की स्थिति से बचने की अपील की है।

यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का माहौल है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

भारत का रुख स्पष्ट है कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए। साथ ही, भारत यह भी मानता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को सुरक्षित और निर्बाध बनाए रखना पूरी दुनिया के हित में है।

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