पाकिस्तान का भारत पर चिनाब नदी के पानी को नियंत्रित करने का आरोप
संवाददाता
8 June 2025
अपडेटेड: 8:50 AM 0thGMT+0530
पानी के मुद्दे पर बढ़ा तनाव
पाकिस्तान ने हाल ही में भारत पर चिनाब नदी के पानी को जानबूझकर नियंत्रित करने का गंभीर आरोप लगाया है। पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि भारत सिंधु जल संधि के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए चिनाब नदी के प्रवाह को रोक रहा है, जिससे पाकिस्तान में कृषि और जल आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। एक उच्चस्तरीय बयान में पाकिस्तानी पक्ष ने कहा कि भारत के इस कदम से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ सकता है। पाकिस्तान ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की बात भी कही है। हालांकि, भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह संधि के नियमों का पूरी तरह पालन कर रहा है और जल प्रवाह में किसी भी तरह की रुकावट के लिए प्राकृतिक कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। भारतीय अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जल प्रबंधन के मुद्दे पर पारदर्शिता बरती जा रही है।
पाकिस्तान ने यह भी दावा किया कि भारत के साथ इस मुद्दे पर कोई गुप्त बातचीत नहीं हो रही है। हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि दोनों देशों के बीच चिनाब नदी के पानी को लेकर गुपचुप चर्चा चल रही है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इन खबरों को अफवाह करार देते हुए कहा कि कोई भी बातचीत केवल औपचारिक और पारदर्शी ढंग से ही होगी। दूसरी ओर, भारत ने भी इस तरह की किसी गुप्त वार्ता से इनकार किया है। भारतीय पक्ष का कहना है कि सिंधु जल संधि के तहत स्थापित तंत्र के जरिए ही सभी मुद्दों पर चर्चा होती है और इसमें कोई गोपनीयता नहीं है। दोनों देशों के बीच इस संधि को लेकर पहले भी कई बार मतभेद सामने आ चुके हैं, लेकिन बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जाती रही है।
सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी, जिसके तहत चिनाब सहित कई नदियों के पानी के बंटवारे पर सहमति बनी थी। यह संधि दशकों से दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार रही है, लेकिन हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जनसंख्या के दबाव ने इस मुद्दे को और जटिल बना दिया है। पाकिस्तान का मानना है कि भारत के बांध और जलाशय इस संधि के म spirit को कमजोर कर रहे हैं, जबकि भारत का कहना है कि वह केवल अपने हिस्से के पानी का उपयोग कर रहा है। इस ताजा विवाद ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे का समाधान केवल आपसी सहयोग और तकनीकी चर्चा से ही संभव है।