पुरी में अनोखी परंपरा: पंचुडोला मिलन महोत्सव -भक्त पालकियों में राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं लेकर झील पार खेली होली :
संवाददाता
10 March 2026
अपडेटेड: 3:15 PM 0thGMT+0530
10 मार्च 2026
पंचुडोला मिलन महोत्सव —
ओडिशा के पुरी जिले के मालुद क्षेत्र में करीब 150 साल पुरानी परंपरा आज भी पूरे उत्साह के साथ निभाई जाती है। यहां ‘पंचुदोला मेलन ’ के दौरान भक्त पालकियों में राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं लेकर झील पार करते हैं और भगवान के साथ होली खेलते हैं।
यह तीन दिवसीय उत्सव होली के पांच दिन बाद शुरू होता है और भगवान राधा-कृष्ण को समर्पित होता है। इस दौरान आसपास के 24 से अधिक गांवों के श्रद्धालु सजाई-धजाई पालकियों में राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं लेकर चिल्का झील पार करते हुए मेले में पहुंचते हैं।
भक्त झील पार कर मंदिर परिसर में भगवान के साथ रंग-गुलाल से होली खेलते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। यह डोला उत्सव होली के पांचवें दिन मनाया जाता है और इस त्यौहार में राधा कृष्ण का प्रेम को सुंदर तरीके से दर्शन का होली उत्सव मनाते हैं।
इस उत्सव की विशेषताएं:
होली के पांचवें दिन इस उत्सव को बनाते हैं इसलिए से पंचमी कहा जाता है ऐसा माना जाता है कि यहां पर सभी देवता डोलाबेदी पर एकत्रित होते हैं। आपको बता दें कि पंच देवता कौन होते हैं –जगन्नाथ दास ,बलराम दास, जसो बंता दास ,अनंत दास और अच्युतानंद दास।
इस अवसर पर जमकर आतिशबाजी की जाती है। और सभी देवताओं की मूर्तियों को ढोल नगाड़ों, शंख की आवाजों के साथ और पारंपरिक नृत्य के साथ निकाला जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे धार्मिक आस्था तथा सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।