बजट 2026- 27:स्वास्थ्य बजट एक लाख करोड़ के पार:
संवाददाता
2 February 2026
अपडेटेड: 10:57 PM 0ndGMT+0530
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस वर्ष के वित्तीय बजट में स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र को खास प्राथमिकता दी है।
कैंसर ,डायबिटीज और दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को सस्ता इलाज उपलब्ध कराने के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य के ढांचे को मजबूत करने पर फोकस किया है।
आयुष और पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़े फैसले लिए गए हैं ।
आयुर्वेद योग और वैलनेस को बढ़ावा देने से शोधकर्ताओं और हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
मेडिकल टूरिज्म शोध और मानव संसाधन विकास के जरिए स्वास्थ्य के क्षेत्र को भी आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुखी की दिशा में भी बनाने पर फोकस किया गया है।
3 नये अखिल भारतीय आयुर्वैदिक संस्थान खुलेंगे:
अखिल भारतीय आयुर्वैदिक संस्थान को विकसित किया जाएगा और तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थाओं से आयुर्वेद शिक्षण प्रशिक्षण और शोध को नई दिशा मिलेगी। यहां आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से पारंपरिक ज्ञान को जोड़ा जाएगा ।देश को कुशल विद्या ,शोधकर्ता और हेल्थ प्रोफेशनल्स मिलेंगे।
चिकित्सा पर्यटन के लिए राज्य सरकार और निजी क्षेत्र की साझेदारी से पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब विकसित किए जाएंगे । इनमें अस्पताल, मेडिकल ,शिक्षा ,रिसर्च ,आयुष केंद्र और पुनर्वास सुविधा होगी । इससे चिकित्सकों ,नर्स और एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार के अवसर बनेंगे।
सरकार हाई क्वालिटी वाले आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स के निर्यात पर खास जोर देगी । जब आयुर्वेदिक दवाएं ,तेल और हर्बल प्रोडक्ट्स अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंचते हैं तो इसका सीधा लाभ औषधीय जड़ी बूटियां उगने वाले किसानों को मिलता है । इसे ऑर्गेनिक और वैज्ञानिक तरीके से बढ़ावा देने की तकनीक को विकसित किया जाएगा।
मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सा क्षेत्र को विकसित किया जाएगा:
वित्त मंत्री ने इस बार के आम बजट में मेंटल हेल्थ को प्राथमिकता दी है। बढ़ती मानसिक समस्याओं से निपटने के लिए इस बजट में दो नए मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट स्थापित करने की घोषणा की गई है । इससे लोगों को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
देश में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं । आज के समय में युवा और वयस्क दोनों ही मानसिक रूप से अस्वस्थ होते जा रहे हैं।
तेजी से बढ़ रहे मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है । जिससे मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों के उपचार और उनकी देखभाल में मदद मिल सके।
रांची और तेजपुर के पुराने स्वास्थ्य संस्थानों को विकसित किया जाएगा। इन संस्थाओं के इंफ्रास्ट्रक्चर, चिकित्सा सुविधा और प्रशिक्षण क्षमता को आधुनिक तरीकों से बेहतर बनाया जाएगा। इसमें आधुनिक थेरेपी, उपकरण, डिजिटल हेल्थ सर्विसेज और विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी जिससे मरीजों को बेहतर और तुरंत सेवाएं मिल सके।
अगले 5 वर्षों में एक लाख स्वास्थ्य प्रोफेशनल जोड़े जाएंगे।
इनमें ऑप्टोमेट्री, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया ,ओटी टेक्नोलॉजी, मनोविज्ञान जैसे 10 विषय शामिल होंगे।
बुजुर्गों और मरीजों की देखभाल के लिए मजबूत केयर सिस्टम तैयार होगा। देखभाल करने वालों को योग, वैलनेस और मेडिकल उपकरण चलाने जैसे कई कौशल सिखाए जाएंगे। एक साल में डेढ़ लाख लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
जिला अस्पतालों में आपात और क्रोमा केयर सुविधा 50% तक बढ़ेंगे। मानसिक स्वास्थ्य और आपात देखभाल के लिए उत्तर भारत में एक नया राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान स्थापित किया जाएगा। आने वाले वर्षों में यह कदम मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
बायोफार्मा के लिए 10 हजार करोड रुपए:
कैंसर और डायबिटीज के मरीजों को 17 कैंसर दवाएं और साथ दुर्लभ बीमारियों के दावों से आयात शुरू हटाया गया है।
बायोफार्मा सेक्टर में नई दावों के शोध और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 5 वर्षों में 10000 करोड़ का निवेश किया जाएगा।
जामनगर स्थित WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडीशनल मेडिसिन को अपग्रेड किया जाएगा।
मेडिकल वैल्यू टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पांच रीजनल हब स्थापित किए जाएंगे ,जिनमें आयुष केंद्र भी होगा।
इस बार के बजट में बायोफार्मा शक्ति योजना घोषित की गई । इसमें अगले 5 वर्षों में बायोफार्मा सेक्टर में 10 हजार करोड़ का निवेश होगा। जिसके अंतर्गत डायबिटीज, ऑटोइम्यून जैसी बीमारियों की सस्ती और उन्नत दवाएं भारत में ही बनाई जाएगी । उनके रिसर्च के लिए तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा और अनुसंधान संस्थान खुलेंगे। मौजूदा सात संस्थान अपग्रेड होंगे । देश भर में 1हजार से अधिक मान्यता प्राप्त इंडियन क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का नेटवर्क बनेगा।