बनारस में गूँजी बैतूल के भरेवा शिल्प की धमक, CM मोहन यादव ने शिल्पी गन्नू रावत को किया सम्मानित

khabar pradhan

संवाददाता

2 April 2026

अपडेटेड: 3:56 PM 0ndGMT+0530

बनारस में गूँजी बैतूल के भरेवा शिल्प की धमक, CM मोहन यादव ने शिल्पी गन्नू रावत को किया सम्मानित

2 अप्रैल 2026
वाराणसी/बैतूल:

बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में आयोजित ‘उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश सहयोग सम्मेलन’ में मध्य प्रदेश की पारंपरिक कला का जादू सिर चढ़कर बोला। इस खास मंच पर बैतूल जिले की विश्व प्रसिद्ध ‘भरेवा शिल्प’ (Bharewa Art) को न केवल सराहा गया, बल्कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद इस कला की बारीकियों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

सम्मेलन के दौरान बैतूल के प्रताप वार्ड निवासी कलाकार गन्नू रावत ने अपनी अद्भुत बेल मेटल कलाकृतियों का प्रदर्शन किया। उन्होंने भरेवा शिल्प से तैयार ‘मोर चिमनी’ मुख्यमंत्री को दिखाई, जिसे देखकर डॉ. यादव मंत्रमुग्ध हो गए। मुख्यमंत्री ने गन्नू रावत को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया और इस कला को सहेजने के लिए उनकी पीठ थपथपाई।
जीआई टैग से मिली नई पहचान
हाल ही में भरेवा शिल्प को जीआई टैग (Geographical Indication) प्राप्त हुआ है, जिसने इस कला की प्रतिष्ठा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा दिया है।
* कला की खासियत: यह कला पीढ़ियों पुरानी है, जिसमें धातु को पिघलाकर हाथ से बारीक नक्काशी वाली मूर्तियां और सजावटी सामान बनाए जाते हैं।
* पारंपरिक सौंदर्य: इस शिल्प में जनजातीय संस्कृति और प्रकृति की झलक देखने को मिलती है, जो इसे दूसरी कलाओं से अलग बनाती है।

“देश के हर राज्य तक पहुँचेगी भरेवा कला”
सम्मान पाकर उत्साहित गन्नू रावत ने अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में कहा, “मेरा लक्ष्य इस पारंपरिक विरासत को केवल मध्य प्रदेश तक सीमित रखना नहीं, बल्कि देश के हर कोने तक पहुँचाना है।”
शिल्पी की इस उपलब्धि पर संतोष धुर्वे, शैलेंद्र बिहारिया और हिमांशु सोनी सहित कई गणमान्य लोगों ने उन्हें बधाई दी। साथ ही यह सुझाव भी दिया गया कि इस कला को स्कूल और कॉलेज स्तर पर सिखाया जाना चाहिए।
अगर युवा इस शिल्प को सीखेंगे, तो यह ऐतिहासिक विरासत कभी लुप्त नहीं होगी।

बैतूल का भरेवा शिल्प अब केवल एक सजावटी वस्तु नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की पहचान का गौरव बन चुका है।

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