बोरवेल में गिरे 2 साल के मासूम की मौत: 22 घंटे चले रेस्क्यू के बाद निकाला गया शव.

khabar pradhan

संवाददाता

11 April 2026

अपडेटेड: 4:14 PM 0thGMT+0530

बोरवेल में गिरे 2 साल के मासूम की मौत: 22 घंटे चले रेस्क्यू के बाद निकाला गया शव.

11 अप्रैल 2026

उज्जैन:
मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। बड़नगर तहसील के ग्राम झालरिया में खुले बोरवेल में गिरे दो साल के बच्चे भागीरथ की जान नहीं बचाई जा सकी। करीब 22 घंटे तक चले लंबे बचाव अभियान के बाद शुक्रवार शाम को बच्चे का शव बाहर निकाला गया।

भागीरथ का परिवार मूल रूप से राजस्थान के पाली जिले का रहने वाला है और यहां भेड़ चराने के लिए आया हुआ था। परिजनों ने बताया कि गुरुवार को उन्हें एक मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने राजस्थान जाना था। बच्चे को नए कपड़े पहनाकर तैयार किया गया था। खेलते-खेलते मासूम भागीरथ एक खुले बोरवेल के पास पहुंच गया, जिस पर सिर्फ एक पत्थर ढका था। बच्चे ने जैसे ही वह पत्थर हटाया और वहां पैर लटकाकर बैठा, वह सीधे गहराई में जा गिरा।

22 घंटे तक चली जिंदगी और मौत की जंग
हादसे की सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा मौके पर पहुंचे। उज्जैन के साथ-साथ इंदौर, हरदा और भोपाल से NDRF और SDRF की टीमें बुलाई गईं।
बचाव कार्य के दौरान कई चुनौतियां आईं:
समानांतर गड्ढा खोदा गया और सुरंग बनाने की कोशिश की गई।
जमीन के नीचे सख्त चट्टान आने की वजह से खुदाई में काफी समय लगा।
जब बोरवेल के अंदर कैमरा डाला गया, तो बच्चा पानी में डूबा हुआ दिखा और उसके शरीर में कोई हलचल नहीं नजर आई।

शुक्रवार शाम को जब बच्चे का शव निकाला गया, तो पूरे इलाके में मातम छा गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

भागीरथ के पिता प्रवीण देवासी और माता जत्तू बाई का रो-रोकर बुरा हाल है। यह घटना एक बार फिर प्रशासन और जमीन मालिकों की लापरवाही को उजागर करती है, जो बोरवेल को खुला छोड़ देते हैं। मासूम का शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है, लेकिन इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।

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