भोजशाला मामला: सवा सौ साल पहले ही सिद्ध हो गया था यहाँ मंदिर है, हाई कोर्ट में ASI की रिपोर्ट ने बढ़ाई हलचल
संवाददाता
10 April 2026
अपडेटेड: 3:09 PM 0thGMT+0530
10 अप्रैल 2026
इंदौर / धार:
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट के इंदौर खंडपीठ में नियमित सुनवाई जारी है। सुनवाई के चौथे दिन हिंदू पक्ष के वकीलों ने कोर्ट के सामने बेहद चौंकाने वाले तथ्य रखे हैं। हिंदू पक्ष का दावा है कि भोजशाला का मंदिर होना आज से सवा सौ साल पहले यानी साल 1902 और 1904 में ही वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है।
लॉर्ड कर्जन की रिपोर्ट का दिया हवाला
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से पैरवी कर रहे वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट को बताया कि साल 1904 में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से भोजशाला को वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर बताया था। इसके अलावा 1902 के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के रिकॉर्ड में भी इस जगह को राजा भोज द्वारा बनवाई गई पाठशाला और मंदिर के रूप में दर्ज किया गया है।
एएसआई के सर्वे में क्या मिला?
हाल ही में हाई कोर्ट के आदेश पर एएसआई ने भोजशाला परिसर में 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे किया था। लगभग 2100 पन्नों की इस विस्तृत रिपोर्ट में कई अहम खुलासे हुए हैं:
सर्वे के दौरान दीवारों और खंभों पर भगवान गणेश, ब्रह्मा, नृसिंह और हनुमान जी के चित्र मिले हैं।
परिसर के भीतर त्रिशूल और अन्य सनातन धर्म के प्रतीक चिन्ह भी पाए गए हैं।
खंभों पर की गई नक्काशी और लिखे गए शब्दों से यह पुष्टि होती है कि यहाँ कभी संस्कृत की शिक्षा दी जाती थी।
कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक जांच से यह पता चला है कि मस्जिद के मेहराब बहुत बाद में अलग से बनाए गए थे, जबकि मुख्य ढांचा 11वीं-12वीं शताब्दी के परमार कालीन मंदिर का ही है।
मंदिर के मलबे से बनी मस्जिद?
हिंदू पक्ष ने तर्क दिया कि एएसआई की रिपोर्ट और पुरानी ऐतिहासिक रिपोर्ट्स यह साबित करती हैं कि मूल मंदिर को तोड़कर उसी के मलबे और पत्थरों का उपयोग करके इसे मस्जिद का रूप देने का प्रयास किया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि भोजशाला की वास्तुकला धार के अन्य मंदिरों और परमार काल के निर्माणों से पूरी तरह मेल खाती है।
आज भी जारी रहेगी सुनवाई
गुरुवार को हुई लंबी बहस के बाद जस्टिस आलोक अवस्थी और जस्टिस कुमार शुक्ला की बेंच ने मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार दोपहर के लिए तय की है। हिंदू पक्ष चाहता है कि इन वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर हिंदू समाज को भोजशाला में पूजा का पूर्ण अधिकार दिया जाए।
फिलहाल, एएसआई की 2100 पन्नों की रिपोर्ट और लॉर्ड कर्जन के समय के ऐतिहासिक दस्तावेज इस कानूनी लड़ाई में सबसे बड़े आधार बनकर उभरे हैं। कोर्ट की आगामी कार्यवाही पर अब पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।