मध्य प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीदी शुरू, किसानों को मिलेगा बोनस और तिलक लगाकर होगा स्वागत
संवाददाता
9 April 2026
अपडेटेड: 3:20 PM 0thGMT+0530
9 अप्रैल 2026
भोपाल:
मध्य प्रदेश में आज यानी 9 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीदी का काम शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने इस साल रबी सीजन के लिए प्रदेश भर में गेहूं उपार्जन की व्यापक तैयारियां की हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ किया है कि इस बार सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिले और उन्हें मंडियों में किसी तरह की परेशानी न हो।
इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग समेत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आज से उपार्जन केंद्रों पर हलचल शुरू हो गई है। खास बात यह है कि इस बार सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। यानी सबसे पहले उन किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा जो छोटे रकबे में खेती करते हैं, इसके बाद मध्यम और बड़े किसानों की बारी आएगी।
दाम और फायदे की बात
किसानों के लिए सबसे खुशी की बात यह है कि उन्हें समर्थन मूल्य के साथ बोनस का लाभ भी मिल रहा है। केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इसके ऊपर मध्य प्रदेश सरकार अपनी तरफ से 40 रुपये प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि (बोनस) दे रही है। इस तरह किसानों को कुल 2,625 रुपये प्रति क्विंटल का दाम मिलेगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि सरकार आने वाले समय में इस भाव को 2,700 रुपये प्रति क्विंटल तक ले जाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।
रिकॉर्ड पैदावार और खरीदी का लक्ष्य
इस साल मध्य प्रदेश में गेहूं की बंपर पैदावार होने की उम्मीद है। पिछले साल के मुकाबले गेहूं बोने का रकबा करीब 3 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से गेहूं खरीदी का कोटा बढ़ाने की भी मांग की है। वर्तमान में भारत सरकार ने 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य दिया है, लेकिन राज्य सरकार का अनुमान है कि किसान इससे कहीं ज्यादा गेहूं बेचने के लिए केंद्रों पर आएंगे। इस बार करीब 19 लाख 4 हजार किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है, जो पिछले साल के मुकाबले 3 लाख 65 हजार ज्यादा है।
उपार्जन केंद्रों पर क्या है खास इंतजाम
प्रदेश भर में 3,627 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। गर्मी के मौसम को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी प्रभार वाले मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि केंद्रों पर छाया और ठंडे पानी की पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ ही बारदाने (बोरी) की कमी न हो, इसके लिए भी पहले से स्टॉक जमा कर लिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय में एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है जो सीधे तौर पर खरीदी की निगरानी करेगा।
इतना ही नहीं, भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा ने यह भी तय किया है कि उपार्जन केंद्रों पर आने वाले किसानों का आत्मीय स्वागत किया जाएगा। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों को तिलक लगाकर और उन पर पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन करें ताकि वे खुद को सम्मानित महसूस करें।
विपक्ष का रुख
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने भी किसानों के मुद्दों को लेकर सक्रियता दिखाई है। कांग्रेस की योजना है कि वे ऋण वसूली, खरीदी की तारीखों में बदलाव और कम मूल्य मिलने जैसी समस्याओं को लेकर जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे।
कुल मिलाकर, प्रदेश में गेहूं खरीदी का उत्सव शुरू हो चुका है और प्रशासन का दावा है कि वह हर किसान की उपज खरीदने के लिए तैयार है।