मिडल ईस्ट में फिर बढ़ा तनाव: ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग तेज, ट्रंप ने दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

khabar pradhan

संवाददाता

10 April 2026

अपडेटेड: 3:29 PM 0thGMT+0530

मिडल ईस्ट में फिर बढ़ा तनाव: ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग तेज, ट्रंप ने दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

10 अप्रैल 2026
नई दिल्ली / वाशिंगटन:
मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) के हालात एक बार फिर गंभीर हो गए हैं। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रही शांति की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। ईरान ने अमेरिका पर सीजफायर (युद्धविराम) की शर्तों को तोड़ने का सीधा आरोप लगाया है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि वे पीछे नहीं हटेंगे।
ईरान का अमेरिका पर बड़ा आरोप
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने दावा किया है कि अमेरिका ने समझौते की बुनियादी शर्तों का उल्लंघन किया है। ईरान का कहना है कि जिस आधार पर बातचीत होनी थी, अमेरिका के रवैये के कारण वह पहले ही टूट चुकी है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक लेबनान को समझौते में शामिल नहीं किया जाता, तब तक कोई शांति वार्ता सफल नहीं हो सकती।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक संघर्ष विराम पूरी तरह लागू नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी सेना के जहाज और विमान ईरान के आसपास ही तैनात रहेंगे। ट्रंप ने साफ किया है कि अगर समझौते का पालन नहीं हुआ, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
हॉर्मुज स्ट्रेट में तनाव और नया ‘टैक्स’
तनाव का असर अब व्यापार पर भी दिखने लगा है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक ‘हॉर्मुज स्ट्रेट’ से गुजरने वाले तेल के जहाजों पर 1 डॉलर प्रति बैरल का टैक्स (टोल) लगाने की योजना बनाई है। खास बात यह है कि ईरान यह भुगतान क्रिप्टोकरेंसी में चाहता है। साथ ही ईरान ने समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों से बचने के लिए एक नया नक्शा भी जारी किया है, जिससे जहाजों की आवाजाही पर उसका पूरा कंट्रोल रहे।
भारतीयों के लिए एडवाइजरी
लेबनान और आसपास के इलाकों में बढ़ते इजरायली हमलों के कारण हालात बिगड़ रहे हैं। भारत सरकार ने वहां फंसे अपने करीब 7,500 नागरिकों, जिनमें ज्यादातर मेडिकल और इंजीनियरिंग के छात्र हैं, के लिए एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने भारतीयों को आर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित बाहर निकलने की सलाह दी है।
शांति की आखिरी उम्मीद
इतने तनाव के बावजूद डिप्लोमेसी (कूटनीति) के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। जानकारों का मानना है कि सैन्य विकल्प के बजाय केवल बातचीत ही इस क्षेत्र में स्थायी शांति ला सकती है। फिलहाल लेबनान में जारी हमलों में मरने वालों की संख्या 250 के पार पहुँच चुकी है, जिससे पूरी दुनिया में चिंता का माहौल है।

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