मुफ्त सुविधाओं पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार, सब फ्री मिलेगा तो कोई काम क्यों करेगा?
संवाददाता
20 February 2026
अपडेटेड: 4:00 PM 0thGMT+0530
मुफ्त योजनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी
देश में चल रही मुफ्त योजनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए पूछा कि अगर लोगों को मुफ्त में खाना मिलता रहेगा तो वे काम क्यों करेंगे। अदालत ने कहा कि ऐसी योजनाओं का समाज और अर्थव्यवस्था पर असर समझना जरूरी है। इस दौरान जस्टिस की बेंच ने सरकारों से पूछा कि क्या मुफ्त राशन और अन्य सुविधाएं लोगों की रोजगार की इच्छा को प्रभावित कर रही हैं।
आर्थिक विकास और मुफ्त योजनाओं का संतुलन जरूरी
आर्थिक विकास और मुफ्त योजनाओं का संतुलन जरूरी है, यह अदालत की चिंता का केंद्र बना रहा। सुनवाई के दौरान कहा गया कि मुफ्त उपहारों और सुविधाओं का उद्देश्य जरूरतमंदों की मदद करना है, लेकिन इसका दीर्घकालिक प्रभाव भी देखा जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सामाजिक सुरक्षा योजनाएं जरूरी हैं, परंतु इनके कारण लोगों की आत्मनिर्भरता कम नहीं होनी चाहिए।
विकास कार्यों पर असर
बिजली बिल माफी और अन्य रियायतों पर भी अदालत ने सवाल उठाए, जिससे राज्यों की वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि यदि राजस्व का बड़ा हिस्सा मुफ्त योजनाओं में खर्च होगा तो विकास कार्यों पर असर पड़ सकता है। इस पर राज्यों से जवाब मांगा गया कि वे किस तरह संतुलन बनाकर योजनाओं को लागू कर रहे हैं।
कौशल विकास एवं प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर
रोजगार सृजन और कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत भी सुनवाई में सामने आई। अदालत ने सुझाव दिया कि सरकारों को ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहिए, जो लोगों को काम और प्रशिक्षण से जोड़ें। इससे आर्थिक रूप से मजबूत समाज बनाने में मदद मिल सकती है और मुफ्त योजनाओं पर निर्भरता भी घटेगी।
सामाजिक न्याय और जिम्मेदारी दोनों साथ चलें, इस संदेश के साथ कोर्ट ने आगे की सुनवाई तय की। मामले में सरकारों और संबंधित पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा गया है। आने वाले समय में यह बहस देश में मुफ्त योजनाओं और आर्थिक नीतियों को लेकर नई दिशा तय कर सकती है।