शीतला सप्तमी – अष्टमी 2026 कब है: क्यों करते हैं शीतला अष्टमी का पूजन:
संवाददाता
10 March 2026
अपडेटेड: 12:12 PM 0thGMT+0530
शीतला अष्टमी का पूजन मुहूर्त और पूजा विधि:
10 मार्च 2026:
चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी मनाई जाती है । इस दिन शीतला माता को बासी भोजन का भोग लगाकर पूजन किया जाता है ।
आईए जाने सही तारीख और शुभ मुहूर्त —
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 10 मार्च से हो रहा है।
शीतला अष्टमी का पूजन 11 मार्च को किया जाएगा इस दिन माता को ठंडी चीज जैसे दही रबड़ी और मीठे गुलगुले को प्रसाद के रूप में भोग लगाया जाता है। सीता शीतला माता को गर्मी से राहत देने वाली माता के रूप में पूजन किया जाता है। गर्मी में होने वाली बीमारियां चेचक खसरा और संक्रामक रोगों से रक्षा करने वाली देवी भी माना जाता है।
इन बीमारियों के प्रकोप से बचने के लिए शीतला माता की पूजा किया जाता है।
इस दिन साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है क्योंकि ऋतु परिवर्तन के दौरान घर में छोटे-छोटे कीड़े मकोड़े पनपने लगते हैं । साफ-सफाई के द्वारा इन्हें दूर किया जाता है। बदलते मौसम से होने वाली बीमारियां से बचाव के लिए शीतला माता का व्रत कब विशेष महत्व है। इसके पूजन से घर परिवार में शीतलता, सुख समृद्धि और निरोगी जीवन की कामना के लिए यह व्रत किया जाता है ।
वैज्ञानिक आधार:
ऋतु परिवर्तन के दौरान अब सर्दी समाप्त हो चुकी होती है और गर्मी का आगमन हो चुका होता है। और अब बासा भोजन बंद कर ताजा भोजन करना चाहिए।शीतला माता की पूजा का सांकेतिक अर्थ यह निकाला जाता है।
ज्योतिषी आधार:
शीतला माता की पूजा ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह अर्थ निकाला जाता है कि चंद्रमा के प्रभाव वाले नक्षत्र का योग होने से इस दिन रोग निवारक और मानसिक शांति के लिए विशेष तौर पर फलदाई माना जाता है।
धार्मिक आधार:
क्योंकि शीतला माता को धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आरोग्य की देवी का रूप माना जाता है । इसीलिए शीतला माता की पूजा में बासे भोजन का भोग लगाया जाता है ।
शीतला अष्टमी का महत्व :
इस दिन मां दुर्गा के स्वरूप का शीतला माता के रूप में विधि विधान से पूजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि शीतला सप्तमी पर माता को बासा और ठंडा खाने का भोग लगाया जाता है। और यह पूजन सभी माताएं और बहनें अपने संतान की दीर्घायु की कामना और उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए करते हैं। ऐसा मानते हैं इससे बच्चों पर बुरी नजर नहीं लगती कई जगह इस बांसवाड़ा के नाम से भी जाना जाता है।
शीतला माता की पूजन में माता को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। जिसे रात में ही तैयार कर लिया जाता है और अगले दिन माता को उसका भोग लगाया जाता है । पूजन के बाद घर के सभी सदस्य प्रसाद के रूप में इस भोजन को ग्रहण करते हैं। इस प्रसाद में कई जगह हलवा पूरी और कई जगह मीठे गुलगुले भी बनाए जाते हैं। राजस्थान मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में इस त्यौहार को बड़े धूमधाम से मनाते हैं और इसे बांसोड़ा के रूप में जानते हैं।
कई जगह शीतला सप्तमी मनाई जाती है और कई जगह अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।
कैसे करें माता शीतला की पूजा:
सप्तमी या अष्टमी , जिस दिन आप पूजन कर रहे है , सबसे पहले स्नान करके मंदिर जाएं। पहले माता को जल अर्पित करें। दीपक जलाएं , हल्दी कुमकुम फूल अर्पित करें। माता कुशवाहा की सामग्री अर्पित करें। जो भी पकवान बनाएं हो, पुआ, खीर-पुड़ी, कढ़ी-चावल, भीगी हुई चने की दाल आदि साम्रगी का भोग लगाएं। इस दिन सुबह और शाम दोनों समय चूल्हा नहीं जलाते हैं और बासी भोजन ही ग्रहण करते हैं। बासी भोजन का भोग लगाने के कारण ही इसे बासोड़ा पूजा कहा जाता है।
इस पूजन की सबसे खास बात यह है जो लोग किसी कारणवश सप्तमी और अष्टमी के दिन माता शीतला की बासोड़ा पूजा नहीं कर पाते हैं, वे पूरे चैत्र महीने के किसी भी मंगलवार या शनिवार को माता शीतला को जल अर्पित कर ,बासोड़ा पूजा कर सकते हैं। माता शीतल को चेचक, खसरा, हैजा, त्वचा संबंधी रोग, फोड़े फुंसी , विभिन्न संक्रामक बीमारी से निजात की देवी भी माना गया है।
शीतला सप्तमी कब है:
शीतला सप्तमी का व्रत 10 मार्च 2026 मंगलवार को रखा जाएगा। शीतला अष्टमी का व्रत 11 मार्च, बुधवार को रखा जाएगा।
सप्तमी की शुरुआत: 9 मार्च, दोपहर 11:27 बजे बजे से प्रारंभ होकर 11 मार्च को रात 1:54 तक रहेगी।
ऐसे में सप्तमी की पूजा उदया तिथि के अनुसार 10 मार्च को की जाएगी।
और शीतला अष्टमी 11 मार्च को की जाएगी।