सांसद-विधायकों को सैल्यूट करेंगे पुलिसकर्मी
संवाददाता
26 April 2025
अपडेटेड: 6:55 AM 0thGMT+0530
सांसद-विधायकों को सैल्यूट करेंगे पुलिसकर्मी
मध्य प्रदेश पुलिस का नया नियम: DGP का सख्त आदेश
मध्य प्रदेश में पुलिसकर्मियों के लिए एक नया और चर्चित आदेश जारी किया गया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना ने निर्देश दिए हैं कि अब सभी वर्दीधारी पुलिस अधिकारी और कर्मचारी सांसदों और विधायकों को सैल्यूट करेंगे। यह आदेश सरकारी कार्यक्रमों के साथ-साथ सामान्य मुलाकातों पर भी लागू होगा। इस फैसले ने सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि यह पुलिस मैनुअल के पारंपरिक नियमों से अलग है।
आदेश की प्रमुख बातें: DGP के आदेश के अनुसार, जब भी कोई सांसद या विधायक पुलिस कार्यालय में मिलने आएंगे, तो अधिकारियों को उनसे सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ मुलाकात करनी होगी। इसके अलावा, सांसदों और विधायकों द्वारा भेजे गए पत्रों का जवाब समयबद्ध तरीके से और हस्ताक्षर के साथ देना अनिवार्य होगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि किसी भी सरकारी आयोजन या सामान्य मुलाकात के दौरान वर्दीधारी पुलिसकर्मियों को सांसदों और विधायकों का सैल्यूट करके अभिवादन करना होगा। यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
पुलिस मैनुअल और विवाद: मध्य प्रदेश पुलिस मैनुअल में पहले से ही यह प्रावधान है कि पुलिसकर्मी मुख्यमंत्री, मंत्रियों, और विशिष्ट सरकारी अधिकारियों को सैल्यूट करते हैं। हालांकि, सांसदों और विधायकों को सैल्यूट करने का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इस नए आदेश ने कई सवाल खड़े किए हैं। कुछ पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह नियम मैनुअल के दायरे से बाहर है और इससे पुलिस की स्वायत्तता पर असर पड़ सकता है। वहीं, कुछ लोग इसे सांसदों-विधायकों के प्रति अनावश्यक सम्मान का प्रदर्शन मान रहे हैं।
सियासी प्रतिक्रियाएं: इस आदेश को लेकर विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस, ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह आदेश पुलिस को राजनीतिक दबाव में लाने की कोशिश है। एक ट्वीट में कांग्रेस समर्थक
@Rashkagauri
ने सवाल उठाया कि क्या यह आदेश पुलिस मैनुअल के अनुरूप है और क्या यह पुलिस की गरिमा को प्रभावित नहीं करेगा। दूसरी ओर, बीजेपी ने इस आदेश का समर्थन करते हुए कहा कि यह जनप्रतिनिधियों के सम्मान को दर्शाता है, जो लोकतंत्र का आधार हैं।
DGP का तर्क: DGP कैलाश मकवाना ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह कदम जनप्रतिनिधियों और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए उठाया गया है। उनका कहना है कि सांसद और विधायक जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं, और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार से प्रशासन और जनता के बीच विश्वास बढ़ेगा। आदेश में यह भी जोड़ा गया है कि यह नियम पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली को और जवाबदेह बनाएगा।
जमीनी हकीकत और चुनौतियां: इस आदेश के लागू होने के बाद पुलिसकर्मियों के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पुलिस पहले से ही संसाधनों की कमी और काम के दबाव से जूझ रही है। अब सांसदों-विधायकों के पत्रों का समयबद्ध जवाब देना और प्राथमिकता के आधार पर मुलाकात करना उनके लिए अतिरिक्त बोझ हो सकता है। साथ ही, इस नियम का पालन सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी, जिससे तनाव की स्थिति बन सकती है।