होली पर दुर्लभ संयोग- ग्रहण के साए में खेलेंगे होली:होलिका दहन 2 मार्च को- 3 को सूतक:
संवाददाता
1 March 2026
अपडेटेड: 6:50 PM 0stGMT+0530
होली खेलने पर असमंजस -3 या 4 मार्च को खेले होली:
होली पर दुर्लभ संयोगः ग्रहण के साये में धुलंडी:
1 मार्च 2026:
होली पर्व पर रंग उत्सव मनाने को लेकर लोगों में असमंजस बना है। 122 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब होलिका दहन के ठीक अगले दिन धुलंडी पर ग्रहण का साया रहेगा। 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण होने से सूतक काल मान्य होगा, जिससे तिथियों और उत्सव के समय में बड़ा बदलाव आया है। विद्वानों के बीच सूतक काल में रंग खेलने को लेकर दो राय सामने आई है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. विशाल लक्ष्मीकांत शुक्ला के अनुसार 3 मार्च को सिंह राशि में चंद्र ग्रहण होने से यह ‘खाली दिन’ रहेगा, इसलिए धुलंडी 4 मार्च को मनाई जाएगी। वहीं, कुछ अन्य गणनाओं के अनुसार, 3 मार्च को ही धुलंडी मनाई जा सकती है, बशर्ते सूखे व शुष्क रंगों का प्रयोग किया जाए। विद्वानों का तर्क है कि सूतक में जल का संसर्ग वर्जित होता है।
ज्योतिषीय गणना के आधार पर कई ज्योतिषाचार्य ने बताया कि फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर होलिका पूजन की मान्यता है। 2 मार्च को सायं 5:55 पर पूर्णिमा तिथि के आरंभ होने से होलिका का पूजन 2 मार्च को होगा, क्योंकि 3 मार्च को शाम 6.50 बजे प्रतिपदा तिथि लग जाएगी। इस दृष्टि से 2 मार्च को होलिका का पूजन प्रदोष काल में किया जाएगा। अगले दिन 3 मार्च को धुलंडी मनाई जाएगी। ग्रहण का सूतक होने से शुष्क रंगों का उपयोग किया जा सकता है
3 मार्च को खेले रंग गुलाल :इसी दिन मनाई धूलंडी:
कई ज्योतिषाचार्य के मुताबिक धुलंडी 3 मार्च को मनाना शास्त्र सम्मत है। सूखे रंगों की होली खेलने में दोष नहीं है क्योंकि इस दिन खंडग्रास ग्रस्त उदित चंद्र ग्रहण रहेगा,
जिसका समय 17 मिनट का रहेगा अर्थात शाम 6:47 तक ग्रहण समाप्त हो जाएगा। इस दृष्टि से ग्रहण की मान्यता उतनी नहीं है। इसलिए 3 मार्च को धुलंडी होगी।