अपनाएं ये वास्तु टिप्स — जो घर को बनाएं सुखद और संतुलित !

khabar pradhan

संवाददाता

24 May 2025

अपडेटेड: 2:12 PM 0thGMT+0530

अपनाएं ये वास्तु टिप्स — जो घर को बनाएं सुखद और संतुलित !

अपनाएं ये वास्तु टिप्स -- जो घर को बनाएं सुखद और संतुलित !

वास्तु शास्त्र- सुखद और संतुलित जीवन का आधार

वास्तु शास्त्र प्राचीन भारतीय ज्ञान है जो भवन निर्माण, दिशाओं और ऊर्जा संतुलन पर आधारित है। इसका उद्देश्य है हमारे घर और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाना ताकि सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे। यदि हम अपने घर को वास्तु नियमों के अनुसार सजाएं और व्यवस्थित करें, तो जीवन में अनेक समस्याएं स्वतः ही समाप्त होने लगती हैं।

कुछ प्रभावशाली वास्तु टिप्स, जो आपके जीवन को सरल, सुखद और संतुलित बना सकते हैं:

  1. मुख्य द्वार – ऊर्जा का प्रवेश द्वार
    मुख्य द्वार को वास्तु में बहुत महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि यहीं से ऊर्जा घर में प्रवेश करती है। इसे हमेशा साफ-सुथरा और सजावटी रखें। मुख्य द्वार पर शुभ चिन्ह जैसे “ॐ” या “स्वस्तिक” लगाना सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। यह द्वार उत्तर, पूर्व या ईशान कोण की दिशा में होना शुभ माना गया है।
  2. बैठक कक्ष – सजीवता और आपसी सामंजस्य का स्थान
    बैठक कक्ष को उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना श्रेष्ठ होता है। कमरे में पर्याप्त रोशनी और वेंटिलेशन होना चाहिए। फर्नीचर दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर रखें और उत्तर-पूर्व को खुला रखें ताकि ऊर्जा का प्रवाह बना रहे।
  3. रसोई – स्वास्थ्य और समृद्धि का स्रोत
    रसोई दक्षिण-पूर्व (अग्नि कोण) में होनी चाहिए क्योंकि यह अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करती है। रसोई बनाते समय मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। उत्तर या पश्चिम दिशा में अनाज और मसालों को रखें, यह घर में अन्न और धन की वृद्धि करता है।
  4. शयन कक्ष – विश्राम और संबंधों की मजबूती का स्थान
    मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए, इससे मानसिक स्थिरता और दांपत्य जीवन में संतुलन बना रहता है। सोते समय सिर को दक्षिण या पूर्व दिशा में रखें। बिस्तर के सामने शीशा न लगाएं, इससे नींद में बाधा आ सकती है।
  5. पूजा कक्ष – आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र
    पूजा घर को ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में बनाना सबसे शुभ माना गया है। इसे हमेशा स्वच्छ रखें और वहां कोई भारी सामान न रखें। पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। नियमित दीपक जलाना और मंत्रोच्चारण करना ऊर्जा को शुद्ध करता है।
  6. घर का मध्य भाग – ब्रह्मस्थान
    घर का केंद्र “ब्रह्मस्थान” कहलाता है और इसे खाली या हल्का रखा जाना चाहिए। यहां कोई भारी फर्नीचर, बीम या सीढ़ियाँ नहीं होनी चाहिए। यह स्थान ऊर्जा के संतुलन के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है।
  7. दर्पण और विद्युत उपकरण
    दर्पण को उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार पर लगाएं। शयनकक्ष में दर्पण को बिस्तर के सामने कभी न लगाएं। भारी विद्युत उपकरण जैसे फ्रिज, वॉशिंग मशीन आदि को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखें।
  8. पौधे और प्राकृतिक तत्व
    घर में तुलसी, मनी प्लांट, एलोवेरा जैसे शुभ पौधे लगाएं, विशेषकर उत्तर, पूर्व या ईशान दिशा में। सूखे या मुरझाए पौधे हटा दें क्योंकि वे नकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं।

निष्कर्ष:
वास्तु शास्त्र का उद्देश्य केवल दिशाएं तय करना नहीं है, बल्कि यह जीवन को संतुलित, समृद्ध और शांतिपूर्ण बनाना है। यदि हम अपने घर को वास्तु के सरल नियमों के अनुसार सजाएं, तो न केवल भौतिक बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक लाभ भी मिलते हैं। सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाने के लिए रोजमर्रा की आदतों में थोड़े-बहुत परिवर्तन लाकर हम अपने जीवन को सरल और सुखद बना सकते हैं।

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