13 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ताज़ा घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) की नाकेबंदी करने का सख्त आदेश दे दिया है। इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच हुई 21 घंटे की लंबी मैराथन बातचीत बेनतीजा खत्म होने के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया है।
वार्ता रही पूरी तरह विफल
इस्लामाबाद में हुई इस उच्च स्तरीय बातचीत का मकसद युद्धविराम की राह तलाशना था, लेकिन दोनों पक्ष किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच सके। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान ने परमाणु हथियारों को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दिखाने से साफ इनकार कर दिया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान ने वार्ता की शर्तों को तोड़ा है, जिसके चलते अब सैन्य कार्रवाई और नाकेबंदी जैसे कदम उठाने पड़ रहे हैं।
ट्रंप की सख्त चेतावनी और नया टैक्स
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी जहाज को होर्मुज से गुजरने के लिए अमेरिका को टोल टैक्स देना होगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो भी देश अमेरिका की अनुमति के बिना यहां से जहाज ले जाने की कोशिश करेगा, उसे भारी अंजाम भुगतना होगा। इसके साथ ही ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि चीन ने ईरान को हथियारों की सप्लाई करने की कोशिश की, तो उन पर 50 प्रतिशत टैरिफ (अतिरिक्त टैक्स) लगा दिया जाएगा।
ईरान का कड़ा जवाब
अमेरिका के इस फैसले पर ईरान ने भी कड़े तेवर दिखाए हैं। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा है कि होर्मुज की ओर आने वाले किसी भी अमेरिकी सैन्य जहाज को युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा और उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। ईरान का कहना है कि यह जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत सबके लिए खुला है और अमेरिका की दादागिरी यहां नहीं चलेगी।
दुनिया पर क्या होगा असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग माना जाता है। अगर यहां नाकेबंदी होती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। फिलहाल दोनों देश अपनी-अपनी जिद पर अड़े हैं और खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। मध्यस्थता कर रहे देशों का मानना है कि यदि जल्द ही कोई बीच का रास्ता नहीं निकला, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।


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