अयोध्या में रामलला की सेवा में बदलाव: भीषण गर्मी से बचाने के लिए अब ठंडे जल से स्नान और दही-लस्सी का भोग
संवाददाता
10 April 2026
अपडेटेड: 3:10 PM 0thGMT+0530
10 अप्रैल 2026
अयोध्या:
रामलला की नगरी अयोध्या में सूरज के तेवर तीखे होते ही भगवान की सेवा और दिनचर्या को भी मौसम के अनुरूप बदल दिया गया है। बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी को देखते हुए राम मंदिर प्रशासन ने रामलला के सुख-सुविधा का विशेष ध्यान रखने का फैसला लिया है।
मंदिर के पुजारियों के अनुसार, अब तक रामलला को गुनगुने पानी से स्नान कराया जाता था, लेकिन अब चिलचिलाती गर्मी को देखते हुए प्रभु को शीतल (ठंडे) जल से स्नान कराया जा रहा है। इसका मकसद बढ़ते तापमान के बीच रामलला को शीतलता प्रदान करना है।
भोग में शामिल हुए ठंडे व्यंजन
भगवान के खान-पान यानी ‘भोग’ में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब रामलला को ताजे मौसमी फल, दही, ठंडे पेय पदार्थ, विभिन्न प्रकार के जूस और लस्सी का भोग लगाया जा रहा है। गर्मी के मौसम में इन चीजों को स्वास्थ्य और परंपरा के लिहाज से उत्तम माना जाता है।
दीपक की जगह फूलों से आरती
गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए एक अनोखा बदलाव आरती की पद्धति में भी हुआ है। अब पारंपरिक भारी दीपकों की जगह सुगंधित फूलों से आरती की जा रही है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि ज्यादा दीपक जलने से गर्भगृह का तापमान बढ़ सकता है, इसलिए फूलों की आरती का विकल्प चुना गया है।
गर्भगृह में लगे कूलर और ठंडी हवा के यंत्र
रामलला को तपती गर्मी से बचाने के लिए गर्भगृह में कूलर लगाए गए हैं। प्रशासन अब यहाँ और भी आधुनिक ठंडी हवा के यंत्र (AC या एयर कूलिंग सिस्टम) लगाने की तैयारी कर रहा है ताकि मंदिर के भीतर का वातावरण सुखद बना रहे।
पहनावे में भी दिखा बदलाव
भगवान के वस्त्रों को लेकर भी संवेदनशीलता बरती जा रही है। रामलला को अब भारी और सिल्क के कपड़ों के बजाय हल्के सूती (कॉटन) वस्त्र पहनाए जा रहे हैं। ये वस्त्र न केवल आरामदायक हैं, बल्कि गर्मी सोखने में भी मददगार होते हैं।
प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य आस्था और श्रद्धा के साथ-साथ रामलला की सेवा में मानवीय संवेदनशीलता और मौसम की चुनौतियों का संतुलन बनाए रखना है। अयोध्या आने वाले श्रद्धालु भी प्रभु की इस बदलती दिनचर्या को देखकर अभिभूत हैं।