अयोध्या में 150 किलो का श्रीराम यंत्र स्थापित, राष्ट्रपति मुर्मु ने की पूजा-अर्चना

khabar pradhan

संवाददाता

20 March 2026

अपडेटेड: 4:28 PM 0thGMT+0530

अयोध्या में 150 किलो का श्रीराम यंत्र स्थापित, राष्ट्रपति मुर्मु ने की पूजा-अर्चना

20 मार्च 2026
अयोध्या में हिंदू नववर्ष और नवरात्र के प्रथम दिन गुरुवार को राम मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रामलला के दर्शन किए और 150 किलो वजनी श्रीराम यंत्र की स्थापना में भाग लिया। इस यंत्र को मंदिर की दूसरी मंजिल पर स्थित राम दरबार में स्थापित किया गया है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने इस अवसर पर कहा कि श्रीराम को नमन करना और भारत की वंदना करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक प्रक्रियाओं—भूमिपूजन, रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार के खुलने और मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण—को भारतीय संस्कृति की स्वर्णिम उपलब्धियां बताया। साथ ही सभी को नवरात्र की शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा कि रामराज्य के आदर्शों पर चलते हुए हम नैतिकता और धर्म आधारित राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

क्या है श्रीराम यंत्र?
सनातन परंपरा में हर देवी-देवता के यंत्र का विशेष महत्व होता है। श्रीराम यंत्र भी श्री यंत्र, कुबेर यंत्र और नवग्रह यंत्र की तरह ही एक आध्यात्मिक प्रतीक है, जो भगवान राम की शक्ति को दर्शाता है। यह विशेष ज्यामितीय संरचना वाला यंत्र ब्रह्मांडीय ऊर्जा का गणितीय और आध्यात्मिक रूप माना जाता है।

रामलला मंदिर में स्थापित यह यंत्र करीब 150 किलो वजनी है और इस पर सोने की परत चढ़ाई गई है। इसे तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित मठ में तैयार किया गया था, फिर तिरुपति (आंध्र प्रदेश) लाया गया और वहां से रथयात्रा के माध्यम से अयोध्या पहुंचाया गया।

कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।

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