अरावली पहाड़ियों का विवाद गहराया: मचा सियासी घमासान:
संवाददाता
24 December 2025
अपडेटेड: 4:30 PM 0thGMT+0530
अरावली पहाड़ियों को लेकर विवाद दिन प्रतिदिन गहराता जा रहा है। लोग सोशल मीडिया के जरिए इसको बचाने की मांग तेज कर रहे हैं। यह विवाद सिर्फ राजस्थान तक ही सीमित नहीं रह गया है बल्कि अब यह हरियाणा से शुरू होकर दिल्ली तक पहुंच गया है और लोगों ने इसका प्रखर विरोध करना शुरू कर दिया है।
राजस्थान और उसके आसपास के स्थानीय निवासियों और प्रशासन के बीच इस जमीन के उपयोग को लेकर विरोध जारी है । लोग दावा कर रहे हैं कि इन क्षेत्रों में अवैध खनन और निर्माण की गतिविधियां चल रही है। जिससे अरावली पहाड़ियों की प्राकृतिक संरचना और इसकी स्थिति पर गंभीर खतरा हो सकता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अरावली के पहाड़ी, यहां के जंगल, यहां के जल स्रोतों की सुरक्षा और मिट्टी के संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है । उन्होंने यहां के अवैध खनन को रोकने के लिए और इस क्षेत्र के सुरक्षा बढ़ाने के लिए आवज तेज की है । लोग सोशल मीडिया पर भी अपनी आवाज उठा रहे हैं और अरावली बचाओ आंदोलन के तहत अभियान भी चला रहे हैं।
अरावली बचाओ आंदोलन:
अरावली की पहाड़ियों को बचाने के लिए माउंट आबू से एक नए आंदोलन की शुरुआत हो चुकी है। इस आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता निर्मल चौधरी के नेतृत्व में अरावली बचाओ आंदोलन शुरू किया जा रहा है । जिसे पैदल मार्च द्वारा इस आंदोलन का आगाज किया जाएगा।
इसमें करीब 1000 किलोमीटर की पैदल यात्रा तय की जाएगी ।इस यात्रा में अरावली पहाड़ियों के आसपास बसे हुए सैकड़ो गांव से होकर पैदल यात्रा गुजरेगी और लोगों को पर्यावरण संरक्षण और अरावली बचाने का संदेश दिया जाएगा।
इस आंदोलन की शुरुआत माउंट आबू स्थित अर्बुदा देवी मंदिर से की जाएगी। और नक्की झील की आरती के बाद पैदल मार्च निकाला जाएगा जो विभिन्न क्षेत्रों की ओर रवाना होगा।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना:
अरावली पहाड़ियों को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली की अवैध कटाई से गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं । मिट्टी का कटाव ,जल का संकट और पर्यावरण में असंतुलन जैसी कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं । इसके अलावा इस क्षेत्र में जल का स्तर कम होना ,मौसम संबंधी बदलाव आने की भी संभावना हो सकती है।
लोगों का कहना है कि इस पहाड़ियों के कारण ही थार रेगिस्तान हरियाणा राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक नहीं फैल पाया । अरावली की पहाड़ियां थार रेगिस्तान और इसके आसपास के बीच की जलवायु को संतुलित करने और भूजल के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यहां की पहाड़ी धूल भरी आंधियों को रोकते हैं । इस तरह से प्रदूषण को कम करने में अपना बेहद ही महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। दिल्ली एनसीआर के साथ-साथ उसके आसपास भी प्रदूषण की गंभीर समस्या है । अरावली और इसके आसपास के क्षेत्र में चूना ,पत्थर संगमरमर और ग्रेनाइट के साथ-साथ लेड,जिंक, कॉपर और टंगस्टन जैसे महत्वपूर्ण खनिज भी पाए जाते है। पर्यावरण संरक्षण और विकास में संतुलन आवश्यक होता है।
केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री का स्पष्टीकरण:
अरावली पहाड़ियों पर छिड़ रहे विवाद पर केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित है और इसके सिर्फ 0.19% इलाके में ही खनन होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया की एनसीआर क्षेत्र में खनन की अनुमति नहीं है और इसे लेकर लोगों ने भ्रम फैलाया हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली पर्वतमाला माना जाएगा । इसके अनुसार जो 99 मीटर ऊंची पहाड़ियां है ,क्या वे अरावली का हिस्सा नहीं रह जाएगी। इससे यह आशंका जताई जाती है कि अरावली के एक बड़े क्षेत्र में खनन का रास्ता साफ हो जाएगा। इस फैसले के कारण राजस्थान में अरावली पर्वतमाला के करीब 90% हिस्से संरक्षण से बाहर हो सकते हैं और बड़े पैमाने पर खनन की आशंका हो सकती है । इसी आशंका के कारण लोग आंदोलन पर उतर आए हैं और अरावली पर्वतमाला को बचाने की मुहिम छेड़ रखी है । लोगों के लिए अरावली की सुरक्षा एक सर्वोच्च प्राथमिकता बन चुकी है।