आज के डिजिटल युग में कैसे करें आंखों की देखभाल…
संवाददाता
20 May 2025
अपडेटेड: 12:42 PM 0thGMT+0530
आज के डिजिटल युग में कैसे करें आंखों की देखभाल
आज के डिजिटल युग में हर हाथ में मोबाइल है…..मोबाइल फोन ..आईफोन…हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं. जिसकी वजह से लोगों को कई तरह के फायदे भी हैं….जैसे कम्यूनिकेसन..एजुकेशन..इंटरटेंनमेंट….और सोशल संपर्क लेकिन किसी भी चीज की अति बुरी होती है. मोबाईल फोन, कम्प्यूटर जैसे तकनीक ने हमें भले ही दूर बैठे परिजनों सगे संबंधियों औऱ मित्रों से दूरी का एहसासा न होने देता हो या हमारे कामों को आसान बनाया हो, लेकिन इनके अत्यधिक उपयोग से लोगों में खासकर शारीरिक समस्याएं देखी जा रही हैं. विशेष रूप से बच्चों में मोबाईल फोन पर लगातार गेम खेलने या रील विडियो देखने की वजह से उनमें गंभीर हेल्थ ईशूज़ देखे जा रहे हैं. विशेष रूप से आंखों की सेहत पर इसका बहुत ही बुरा असर देखने को मिल रहा है. इस विषय से संबंधित लोग अभ चिंता करने लगे हैं नेत्र रोग विशेषज्ञ …डॉक्टर्स हमें लगातार जागरुक कर रहे हैं …कई पेरेन्ट्स अपने बच्चों की इन समस्याओं को लेकर बेहद परेशान हैं…..
देखा जा रहा है आजकल बच्चों का स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ता जा रहा है. ऑनलाइन क्लास अटेंड कर रहे हैं…. कार्टून देख रहे हैं …गेम खेल रहे हैं, सोशल मीडिया पर समय बिताना हो, बच्चे दिन का अधिकांश समय स्क्रीन पर ही बिताते हैं. जिसकी वजह से आंखों की समस्याएं बढ़ रही हैं… जैसे- डिजिटल आई स्ट्रेन या कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम, की घटनाएं बढ़ रही हैं. एक अध्ययन में पाया गया कि 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चे औसतन 8 से 10 घंटे तक स्क्रीन पर समय बिताते हैं, जो कि तयसीमा से कहीं अधिक है. यही आंखों में कई प्रकार की समस्याओं का कारण बन रहा है, ….जैसे बच्चों की आंखों में थकान, जलन, सूखापन, और दृष्टि में धुंधलापन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं…. आंखों में थकान लगातार स्क्रीन देखने से होती है….आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे आंखों में थकान, जलन और दर्द का अहसास होता है. यह समस्या विशेष रूप से तब बढ़ती है जब बच्चे लंबे समय तक बिना किसी ब्रेक के स्क्रीन पर समय बिताते हैं…..बच्चों में स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना और उनकी आंखों की सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. कुछ सरल और असरदार उपायों से बच्चों की आंखों को बेहतर किया जा सकता है….
बच्चों को हरी सब्जियां, गाजर, आंवला, और ड्राई फ्रूट्स जैसे अखरोट व बादाम देना चाहिए. ये खाद्य पदार्थ आंखों की रोशनी को मजबूत करने में मदद करते हैं और आंखों की सेहत को बेहतर बनाए रखते हैं….5 साल से छोटे बच्चों को दिन में केवल 1 घंटे स्क्रीन पर समय बिताना चाहिए, जबकि बड़े बच्चों के लिए यह सीमा 2 घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए. यह सीमा बच्चों की आंखों और समग्र स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है…..अगर आंखों में सूखापन और जलन बढ़ जाती है. बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि वे पलकों को नियमित रूप से झपकाएं ताकि आंखों में नैतिक मॉइस्चर बना रहे…..आंखों की नियमित जांच बहुत जरूरी है बच्चों को साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए. इससे किसी भी आंखों की समस्या का समय रहते पता चल सकता है और उसका सही इलाज किया जा सकता है….आज के डिजिटल युग में बच्चों का मोबाइल फोन और स्क्रीन पर बढ़ता समय एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है. हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम बच्चों की सेहत और उनकी आँखों की सुरक्षा के लिए सही कदम उठाएं.