आयुर्वेद: बिना सर्जरी, उपचार का विकल्प बना
संवाददाता
24 February 2026
अपडेटेड: 12:05 PM 0thGMT+0530
आयुर्वेद की ओर रुझान, हजारों मरीजों को राहत
भोपाल में बवासीर जैसी तकलीफदेह बीमारी के इलाज के लिए अब लोग ऑपरेशन और दवाओं के साथ आयुर्वेद को बेहतर विकल्प मानने लगे हैं। कई मरीज सर्जरी से बचने और लंबे समय तक राहत पाने के लिए आयुर्वेदिक उपचार अपना रहे हैं। शहर के आयुर्वेदिक अस्पतालों और क्लीनिकों में इस बीमारी के इलाज के लिए मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है l
खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं अस्पताल में बीते एक साल के दौरान 28 हजार से अधिक मरीजों ने बवासीर के इलाज के लिए संपर्क किया है। इनमें से बड़ी संख्या में मरीजों को आयुर्वेदिक पद्धति से सफल उपचार मिला है। डॉक्टरों का कहना है कि इस पद्धति से मरीजों को कम दर्द और कम जटिलताओं के साथ राहत मिल रही है।
रोजाना 50 से 80 मरीज opd में
डॉक्टरों के अनुसार रोजाना 50 से 80 मरीज बवासीर की समस्या लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। कोविड के बाद से इस बीमारी के मामलों में तेजी आई है। बदलती जीवनशैली, गलत खानपान और लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है, जिससे युवा वर्ग भी प्रभावित हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आयुर्वेदिक उपचार के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा है, क्योंकि कई मामलों में 5 से 7 दिनों में मरीजों को राहत मिलने लगती है। इलाज के बाद बीमारी दोबारा होने की संभावना भी कम रहती है, जिससे लोग सर्जरी की तुलना में इस विकल्प को प्राथमिकता दे रहे हैं।
आधुनिक सर्जरी से ज्यादा सुरक्षित
डॉक्टरों ने बताया कि क्षार सूत्र जैसी प्राचीन और प्रभावी आयुर्वेद की तकनीकों का समन्वय अधिक सुरक्षित और प्रभावी साबित हो रहा है। न्यूनतम चीर फाड वाली यह तकनीक आधुनिक सर्जरी से अधिक सुरक्षित है इसमें टांकों का दर्द नहीं होता और ना ही संक्रमण का खतरा होता है l इस पद्धति में कम दर्द, कम रक्तस्राव और जल्दी रिकवरी के कारण मरीजों की पहली पसंद बनती जा रही है, जिससे शहर में आयुर्वेदिक चिकित्सा का दायरा भी तेजी से बढ़ रहा है।