इस बार होली और धुलेंडी के बीच एक दिन का अन्तर: चंद्र ग्रहण का साया बना कारण
संवाददाता
27 February 2026
अपडेटेड: 8:07 PM 0thGMT+0530
27 फरवरी 2026
भोपाल: ग्रहण और त्योहार का दुर्लभ संयोग
इस वर्ष होली का पर्व खास रहने वाला है क्योंकि इस बार होली और धुलेंडी के बीच ग्रहण का संयोग बन रहा है। दो मार्च को होलिका दहन होगा और चार मार्च को रंगों का पर्व धुलेंडी मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार का संयोग कई वर्षों बाद बन रहा है, जिससे धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से यह पर्व और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
होलिका दहन के समय और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार होलिका दहन दो मार्च, सोमवार को रात 8:30 बजे के बाद करना शुभ रहेगा। चंद्र ग्रहण तीन मार्च, मंगलवार को दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:47 पर समाप्त होगा l
ग्रहण के कारण परंपराओं में बदलाव
ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रहण के कारण रंग खेलने के समय और परंपराओं में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है। कई स्थानों पर लोगों को शुभ मुहूर्त के अनुसार ही रंग खेलने और पूजा-अर्चना करने की सलाह दी जा रही है। मंदिरों और धार्मिक स्थलों में भी विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावधानी जरूरी
मान्यता है कि ग्रहण काल में पूजा-पाठ, भोजन और यात्रा से बचना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इस दौरान मंत्र जाप, ध्यान और धार्मिक कार्य करने को शुभ माना जाता है।
ज्योतिषाचार्यों ने बताया शुभ उपाय
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार होलिका दहन के समय पूजा, दान और विशेष उपाय करने से ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं। गरीबों को अन्न, वस्त्र और गुड़ का दान करना लाभकारी माना गया है।