एमआरआई सुविधा की नई पहल, नगरों की जरूरत के अनुसार लगेगी आधुनिक मशीनें
संवाददाता
20 February 2026
अपडेटेड: 3:33 PM 0thGMT+0530
उपचार की सुविधा नजदीकी अस्पतालों में
प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों के जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने एमआरआई मशीनें लगाने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य यह है कि मरीजों को गंभीर जांच और इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। इस योजना के तहत बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को अब समय पर जांच और उपचार की सुविधा उनके नजदीकी अस्पतालों में मिल सकेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब तक छोटे और मध्यम शहरों के मरीजों को एमआरआई जांच के लिए बड़े शहरों में जाना पड़ता था, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही जांच उपलब्ध होगी, जिससे इलाज की प्रक्रिया तेज और आसान बनेगी।
इसके साथ ही हृदय रोगियों को तत्काल राहत देने के उद्देश्य से सभी केंद्रों पर अत्यधिक कैथलैब की स्थापना का भी निर्णय लिया गया है l हार्ट अटैक की स्थिति में शुरुआती एक घंटा गोल्डन ऑवर कहलाता है वर्तमान में संभागीय केंद्र पर कैथलैब न होने से मरीजों को महानगरों के बड़े अस्पताल में रेफर करना पड़ता है जिस रास्ते में ही कीमती समय निकल जाता है l
सरकार का कहना है कि नगरों की जरूरत और मरीजों की संख्या को ध्यान में रखते हुए मशीनें स्थापित की जाएंगी। इसके लिए जिला और संभाग स्तर पर प्राथमिकता तय की जाएगी, ताकि जहां अधिक जरूरत हो वहां पहले सुविधा शुरू हो सके। इससे अस्पतालों की क्षमता भी बढ़ेगी और इलाज की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह योजना चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। तकनीकी व्यवस्था, प्रशिक्षित स्टाफ और संचालन से जुड़ी तैयारियां पूरी करने के बाद ही मशीनों का संचालन शुरू होगा। इससे जांच की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से मरीजों को राहत मिलने के साथ ही निजी अस्पतालों पर निर्भरता भी कम होगी। समय पर जांच होने से गंभीर बीमारियों का जल्द पता चलेगा और मृत्यु दर को कम करने में भी सहायता मिलेगी। आने वाले समय में यह योजना प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।