एसटी छात्रों के लिए कोचिंग से पहले स्क्रीनिंग टेस्ट अनिवार्य, योजना में बड़े बदलाव

khabar pradhan

संवाददाता

30 March 2026

अपडेटेड: 11:55 AM 0thGMT+0530

30 मार्च 2026

भोपाल

चयन प्रक्रिया होगी सख्त

मध्य प्रदेश सरकार अब एसटी (अनुसूचित जनजाति) छात्रों को यूपीएससी कोचिंग के लिए सीधे नहीं भेजेगी। दिल्ली भेजने से पहले छात्रों का विभागीय स्तर पर एंट्रेंस टेस्ट लिया जाएगा। इस टेस्ट में तय कटऑफ के आधार पर केवल चयनित उम्मीदवारों पर ही सरकार खर्च करेगी।

योजना में 3 बड़े बदलाव

सरकार ने कोचिंग योजना में तीन अहम बदलाव की तैयारी की है।

1. आय सीमा 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है, ताकि अधिक छात्र लाभ ले सकें।
2. कोचिंग के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता अब एक साल की बजाय दो साल तक दी जाएगी, लेकिन दूसरे साल का खर्च केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगा जो पहले प्रयास में प्री या मेंस पास करेंगे।
3. छात्रों को केवल दिल्ली की शीर्ष 5-6 कोचिंग संस्थानों में ही भेजा जाएगा।

पहले चयन प्रक्रिया कमजोर थी

पहले बिना किसी सख्त चयन प्रक्रिया के छात्रों को कोचिंग में भेजा जा रहा था। 2017 में समीक्षा के दौरान पाया गया कि कई चयनित छात्रों की तैयारी और शैक्षणिक स्तर पर्याप्त नहीं था, जिससे योजना का अपेक्षित परिणाम नहीं मिला।

यह योजना 2012-13 से लागू है, जिसमें हर साल लगभग 50 छात्रों को कोचिंग के लिए दिल्ली भेजा जाता था। लेकिन अब तक केवल 12 छात्र ही यूपीएससी प्री और मेंस तक पहुंच सके हैं।

एंट्रेंस टेस्ट एमपी ऑनलाइन, ओपन स्कूल या अन्य सरकारी एजेंसियों के माध्यम से कराया जा सकता है। ऐसी व्यवस्था पहले तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में लागू है।

आर्थिक सहायता में अतिरिक्त सुविधाएं

योजना के तहत कोचिंग फीस के अलावा छात्रों को 12 हजार रुपये प्रतिमाह खाने का खर्च अलग से दिया जाएगा। साथ ही, किताबों के लिए सालाना 15 हजार रुपये भी मिलेंगे।

विदेश में पढ़ाई की योजना का रिव्यू

राज्य सरकार आदिवासी छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई की योजना की भी समीक्षा कर रही है। इस योजना के तहत पीएचडी या रिसर्च के लिए अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को प्रति वर्ष 40 हजार डॉलर (लगभग 38 लाख रुपये) मिलते हैं।

इसके अलावा छात्रों को रहने और खाने के लिए 10 हजार डॉलर सालाना तथा एक बार आने-जाने के लिए हवाई टिकट भी दिया जाता है। हालांकि पिछले तीन वर्षों में केवल 12 छात्र ही इस योजना का लाभ ले पाए हैं।

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