ऑनलाइन गेम का टास्क पूरा करने के लिए तीन बहनों ने की आत्महत्या:

khabar pradhan

संवाददाता

5 February 2026

अपडेटेड: 4:29 PM 0thGMT+0530

ऑनलाइन गेम का टास्क पूरा करने के लिए तीन बहनों ने की आत्महत्या:



खेल के साथ जिंदगी भी खत्म:
नवीं मंजिल से कूदकर की आत्महत्या:

गाजियाबाद में एक कोरियन गेम की लत के शिकार हुई तीन नाबालिग बहनों ने नवी मंजिल से कूद कर आत्महत्या कर ली।
यह खौफनाक घटना मोबाइल की स्क्रीन ,वर्चुअल टास्क और ऐसा दबाव बन गया कि खेल के साथ-साथ जिंदगी भी खत्म हो गई।
इसके पहले भी ऑनलाइन गेम्स में कई जानें गई है । इसमें तीनों बहनें नाबालिग है।  निशिका 16 वर्ष ,प्राची 14 वर्ष और पाखी 12 वर्ष।
सुसाइड नोट में तीनों ने पापा से माफी मांगी है और एक डायरी का जिक्र किया है ।
सुसाइड नोट में क्या लिखा है:

इस सुसाइड नोट में लिखा है– डायरी में जो लिखा है पढ़ लो ,क्योंकि यह सच है ।
आई एम सॉरी ..सुसाइड नोट में इमोजी में एक लड़की रोते हुए दिख रही है ..बताते हैं सुसाइड नोट में लिखा है… हम कोरिया नहीं छोड़ सकते ..कोरिया हमारी जिंदगी है… आप हमें आजाद नहीं कर सकते… हम जान दे रहे हैं…

यह घटना गाजियाबाद की है, जहां भारत सिटी सोसाइटी में बुधवार देर रात एक ऊंची इमारत की नवी मंजिल से तीन नाबालिग बहनों ने एक साथ छलांग लगा दी। यह घटना रात करीब 2:30 बजे हुई।  जब सभी गहरी नींद में सो रहे थे। तभी अचानक तेज आवाजों के साथ चीखें सुनाई देने लगीं। और पूरे इलाके में हड़कंप सा मच गया ।क्षसभी यह सोचने पर मजबूर हो गए कि आखिर तीनों बहनों ने ऐसा क्यों किया।

कौन थी ये तीनों बहनें:
यह तीनों सगी बहनें थी। निशिका सबसे बड़ी थी ,जिसकी उम्र 16 वर्ष थी । उससे छोटी प्राची 14 वर्ष और फिर सबसे छोटी पाखी 12 वर्ष की थी।क्ष यह अपने पिता चेतन कुमार के साथ भारत सिटी सोसाइटी में,
B-1 टावर के फ्लैट नंबर 907 में रहती थी।
यह तीनों बहनें नाबालिग थी और पढ़ाई के साथ-साथ हर वक्त मोबाइल और ऑनलाइन गेम में सक्रिय रहती थी । परिवार में तीनों बहनों के अलावा एक भाई भी है । किंतु यह तीनों बहनें एक साथ काफी लगाव से रहती थी।

यह तीनों बहनें एक साथ नवी मंजिल की बालकनी तक पहुंची और फिर तीनों ने एक-एक करके बालकनी से छलांग लगा दी । जब घर के सभी सदस्य गहरी नींद में सो रहे थे तो किसी को भनक भी नहीं हुई और एक-एक करके बच्चियों ग्राउंड फ्लोर पर गिर गई जिससे उनकी मौत हो गई।
बच्चों के गिरने की आवाज से सभी अपने घर से बाहर निकल आए ।  लोगों ने देखा तो सभी तीनों बहनें खून से लथपथ पड़ी हुई थी । बच्चियों के परिजनों को सूचना दी गई और पूरे सोसाइटी में अफ़रा-तफ़री के साथ चीख पुकार  मच गई । तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी गई।

बच्चियों को तुरंत एंबुलेंस से लोनी के  अस्पताल ले जाया गया। किंतु डॉक्टर ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।  तीनों बच्चियों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है।

सुसाइड नोट से गेम का पता चला:

जांच के बाद पुलिस को एक पन्ने का एक सुसाइड नोट मिला है । जिसमें एक डायरी का जिक्र किया गया है।  उसमें मम्मी पापा सॉरी भी लिखा है।  और डायरी में कुछ इशारे ,कुछ ऐसी बातें लिखी गई है जो अभी समझ से परे हैं ‌‌  इस डायरी को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

पिता का कहना है कि इस घटना के पीछे ऑनलाइन कोरियन गेम है। जो एक टास्क बेस्ड लवर गेम है।  इसे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है । पिता का कहना है कि तीनों बेटियां बहुत समय से इस गेम को खेल रही है।  लेकिन उन्हें नहीं पता था कि गेम का आखिरी टास्क बेहद खतरनाक था।  और उस टास्क को पूरा करने के लिए तीनों बहनों ने मौत का रास्ता चुना था।

पुलिस की जांच में पता चला है कि तीनों बहनें 3 साल से स्कूल भी रेगुलर नहीं जा रही थी।  पिता ने उन्हें गेम खेलने पर ,मोबाइल चलाने पर और ऐप चलाने पर डांटा भी था । पुलिस उनके मोबाइल को कब्जे में लेकर जांच कर रही है।

टास्क बेस्ड गेम में बाॅस भी एक बहन:

तीन बहनें पिछले 3 साल से ऑनलाइन गेम खेल रही थी। यह टास्क बेस्ड गेम था और इस गेम में प्राची 14 वर्ष की बाॅस थी। वह दोनों बहनों को टास्क देती थी और दोनों उसकी हर बात मानती थी।  तीनों हर काम साथ करती थी, खाना, सोना घर के छोटे काम भी साथ ही करती थी।

और इसी कारण तीनों ने ये खौफनाक कदम एक साथ ही उठाया।

पुलिस हर एंगल से इस मामले में जांच कर रही है परिजनों के बयान, मोबाइल के गेम,  ऐप्स, डायरी और डिजिटल लिंक को लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है । जांच के बाद ही इस घटना के बारे में सही पता चल सकता है।  इन बहनों ने किन परिस्थितियों में और किन मानसिक दबाव में आकर यह कदम उठाया।

छानबीन में यह भी पता देखा जा रहा है कि लड़कियां शायद किसी कोरियन लड़के से शादी करना चाहती थी।  क्योंकि उन्हें कोरिया का कल्चर पसंद था।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कोई उनके परिवार को परेशान तो नहीं कर रहा था या कोई व्यक्ति उन्हें मानसिक रूप से गेम पूरा करने का टास्क तो नहीं दे रहा था।

ऑनलाइन गेम्स के टास्क की वजह से पहले भी कई जानें जा चुकी हैं।  2016-17 में ब्लू व्हेल में कई जानें गई थी ‌ । इसके टास्क काफी खतरनाक होते हैं और यह खतरनाक टास्क पूरा करने के लिए बच्चे अपनी जान दे देते हैं। 2018 में किकी चैलेंज में लोग कार चलाते हुए आते ,डांस करते । जिससे कई लोग घायल भी हुए थे

पेरेंट्स के लिए ऑनलाइन गेम चुनौती:
बच्चा यदि एक दिन में 8 से 10 घंटे यदि मोबाइल पर गेम खेलता है तो पेरेंट्स को ध्यान रखने की जरूरत है।  यदि बच्चा मोबाइल छीनने पर, या बैटरी खत्म होने पर रोने लगता है,या गुस्सा करता है या उदास हो जाता है तब भी पेरेंट्स को ध्यान देना जरूरी हो जाता है।
यदि स्कूल में बच्चे के ग्रेड गिर रहे हैं, होमवर्क नहीं होता है,स्कूल  रेगुलर जाने में कमी आ रही है , एकाग्रता में कमी हो रही है तो पेरेंट्स के लिए यह चुनौती का विषय हो सकता है ।

भोपाल के डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी जो वरिष्ठ मनोचिकित्सक हैं,उनका कहना है कि माता-पिता इस समस्या की पहली और सबसे अहम कड़ी होते हैं।  बच्चों के व्यवहार में बदलाव से उन्हें समझना चाहिए कि बच्चा डिजिटल लत की ओर तो नहीं बढ़ रहा । सरकार को भी ऑनलाइन गेम बनाने वाली कंपनियों पर कड़ा नियंत्रण और  व्यवस्था बनानी चाहिए।  डिजिटल संतुलन को स्कूली शिक्षा का अहम हिस्सा बनाएं और बच्चों को सुरक्षित ,संतुलित और स्वस्थ डिजिटल भविष्य की ले जाएं।

टिप्पणियां (0)