ऑपरेशन सिंदूर को वैश्विक मंच पर ले जाने की तैयारी, 59 सांसद 33 देशों में करेंगे भारत की बात
संवाददाता
21 May 2025
अपडेटेड: 12:50 PM 0stGMT+0530
ऑपरेशन सिंदूर को वैश्विक मंच पर ले जाने की तैयारी, 59 सांसद 33 देशों में करेंगे भारत की बात
भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान के आतंकी चेहरे को बेनकाब करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भारत की नीति से अवगत कराने के लिए बड़ा कदम उठाया है. इस कूटनीतिक पहल के तहत 59 भारतीय सांसदों को 33 देशों में भेजा जा रहा है. ये सांसद सात सर्वदलीय डेलिगेशन में बंटे हैं और दुनिया के सामने ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य तथा पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता को उजागर करेंगे.
पहले दो डेलिगेशन हुए रवाना
मंगलवार को पहले दो डेलिगेशन रवाना हुए. जेडीयू सांसद संजय झा के नेतृत्व में पहला प्रतिनिधिमंडल विदेश रवाना हो गया, जबकि शिवसेना के सांसद श्रीकांत शिंदे की अगुआई वाला दूसरा डेलिगेशन रात 9 बजे जाएगा. इन दोनों टीमों में कुल 17 सांसद शामिल हैं.
इन डेलिगेशन के साथ 8 पूर्व राजनयिक भी होंगे, जो रणनीतिक मार्गदर्शन और अनुभव साझा करेंगे. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने मंगलवार को सांसदों को ब्रीफिंग दी और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी रणनीतिक जानकारी साझा की.
दुनिया को दिए जाएंगे ये 5 बड़े संदेश
- आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति
सांसद यह संदेश देंगे कि ऑपरेशन सिंदूर पूरी तरह से आतंक के खिलाफ लक्षित सैन्य अभियान था. आतंकियों के ठिकानों को नष्ट किया गया, जो पूरी तरह पाकिस्तान समर्थित थे. पाक सेना की प्रतिक्रिया से यह भी स्पष्ट हुआ कि वे आतंकी गतिविधियों से कितनी गहराई से जुड़े हैं. - पाकिस्तान आतंकवाद का संरक्षक
सांसदों के पास उन सबूतों की फाइलें हैं, जो यह सिद्ध करती हैं कि पहलगाम हमले के पीछे द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) नामक पाक समर्थित आतंकी संगठन था. इससे पहले के कई आतंकी हमलों का विवरण भी सांसद साथ ले जा रहे हैं. - भारत का संयम और जिम्मेदारी
भारत ने सैन्य कार्रवाई करते हुए सावधानी बरती कि कोई निर्दोष पाक नागरिक हताहत न हो. पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम की अपील आई तो भारत ने जिम्मेदारी के साथ उसे स्वीकार किया. - दुनिया एकजुट हो आतंक के खिलाफ
सांसद वैश्विक समुदाय से अपील करेंगे कि आतंकवाद को लेकर भारत का समर्थन करें. यह भारत-पाक विवाद नहीं, बल्कि आतंकवाद बनाम मानवता की लड़ाई है. - पाक को लेकर भारत की बदली नीति
अब भारत रक्षात्मक नहीं, बल्कि सक्रिय और आक्रामक नीति अपनाएगा. सीमापार से पैदा होने वाले खतरों पर भारत पहले ही कार्रवाई करेगा, ताकि आतंकी मंसूबे सफल न हो सकें.