ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणी करने वाले प्रोफेसर अली खान को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत, जांच जारी रहेगी…
संवाददाता
21 May 2025
अपडेटेड: 9:55 AM 0stGMT+0530
ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणी करने वाले प्रोफेसर अली खान को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत, जांच जारी रहेगी:
हरियाणा के सोनीपत स्थित अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है. उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर सेना के ऑपरेशन सिंदूर और उसमें भाग लेने वाली महिला सैन्य अधिकारियों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं. कोर्ट ने जहां उन्हें जमानत दी, वहीं कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं, जिसमें उनसे भविष्य में इस विषय पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी से रोक लगाई गई है.
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: पासपोर्ट सरेंडर और SIT जांच के आदेश:
सुप्रीम कोर्ट ने अली खान को जमानत देते हुए स्पष्ट कहा कि वे ऑपरेशन सिंदूर, आतंकी हमलों या भारत की जवाबी कार्रवाई पर कोई बयान या स्पीच नहीं देंगे. कोर्ट ने जांच रोकने से भी इनकार कर दिया और मामले को गंभीर मानते हुए 24 घंटे के भीतर तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों की विशेष जांच टीम (SIT) बनाने का आदेश दिया. इसमें एक महिला अधिकारी की नियुक्ति भी अनिवार्य होगी. कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि इस मामले को लेकर यदि कोई हंगामा या अशांति फैलाई गई तो उससे निपटने की पूरी रणनीति उनके पास है.
साथ ही, प्रोफेसर अली खान को अपना पासपोर्ट सरेंडर करना होगा ताकि वह देश छोड़कर न जा सकें. जांच की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने SIT में हरियाणा या दिल्ली पुलिस का कोई भी अधिकारी शामिल न करने का आदेश दिया है.
दो एफआईआर दर्ज, महिला आयोग ने की सख्त कार्रवाई की मांग:
प्रोफेसर अली खान के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई हैं. पहली शिकायत जठेड़ी गांव के सरपंच द्वारा राई थाना, सोनीपत में दी गई, जबकि दूसरी शिकायत हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया की ओर से दर्ज कराई गई. आरोप है कि प्रोफेसर ने 7 मई 2025 को सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर ऑपरेशन सिंदूर के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. उन्होंने विशेष रूप से महिला सैन्य अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह के खिलाफ अनुचित बातें कही थीं, जो ऑपरेशन सिंदूर की प्रेस ब्रीफिंग में शामिल थीं.
महिला आयोग ने इस मामले को महिलाओं के सम्मान और देश की सुरक्षा के विरुद्ध अपमानजनक कृत्य बताया और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की.
गिरफ्तारी के बाद रिमांड और न्यायिक हिरासत:
सोनीपत पुलिस ने प्रोफेसर अली खान को दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके से गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद उन्हें रात में कोर्ट में पेश कर दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया. रिमांड समाप्त होने के बाद 20 मई को उन्हें दोबारा कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें सात दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
अब, सुप्रीम कोर्ट से मिली सशर्त जमानत के बाद उन्हें जेल से रिहा किया जाएगा, लेकिन उनके खिलाफ जांच पूरी पारदर्शिता और सख्ती के साथ जारी रहेगी. यह मामला भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राष्ट्रीय सुरक्षा और महिलाओं के सम्मान के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को सामने लाता है.