कल से शुरू हो रहे हैं होलाष्टक:  इन दिनों क्या करें –क्या ना करें!

khabar pradhan

संवाददाता

23 February 2026

अपडेटेड: 6:55 PM 0rdGMT+0530

कल से शुरू हो रहे हैं होलाष्टक:  इन दिनों क्या करें –क्या ना करें!

24 फरवरी से शुरू हो रहे हैं होलाष्टक:  वर्जित रहेंगे शुभ मांगलिक कार्य!

रंगो का त्योहार होली देशभर में पूरे उल्लास के साथ मनाया जाता है।
होली से ठीक एक हफ्ते पूर्व का समय यानी आठ दिनों का समय होलाष्टक का माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन दिनों  किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।
कब से शुरू हो रहे हैं होलाष्टक:
फाल्गुनी मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होलाष्टक प्रारंभ होते हैं और इसका समापन होलिका दहन के साथ होता है।
इस वर्ष 24 फरवरी से प्रारंभ हो रहे हैं जो 3 मार्च तक चलेंगे।

24 फरवरी से होलाष्टक का प्रभाव शुरू हो रहा है। पंचांग के अनुसार इस दिन सुबह 7:02 से होलाष्टक प्रारंभ हो रहे हैं ,जो 3 मार्च को होलिका दहन तक रहेंगे । इन दिनों किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं ।
क्यों वर्जित होते हैं शुभ कार्य होलाष्टक में :

धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक की अवधि में ग्रहों का स्वभाव उग्र रहता है । इन आठ दिनों में चंद्रमा ,सूर्य, शनि और अन्य ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं।  ग्रहों की इन उग्रता के कारण व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता और मानसिक एकाग्रता प्रभावित होती है। जिस कारण नया घर खरीदना, भूमि पूजन, मुंडन, विवाह, सगाई या नए वाहन की खरीदी, बिक्री जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते।

पौराणिक मान्यता के अनुसार होलाष्टक का संबंध प्रहलाद की पौराणिक कथा से माना जाता है । जहां हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु की भक्ति से क्रोधित होकर अपने ही पुत्र प्रहलाद को होलिका दहन से ठीक 8 दिन पहले से प्रताड़ना देना शुरू कर दिया था । इन आठ दिनों तक प्रहलाद को पर्वत से फेंकने, विष देने, हाथियों से कुचलवाने जैसे कई ऐसे प्रयास किए गए ,जिसमें प्रहलाद को घोर शारीरिक और मानसिक कष्ट हुआ। यह आठ दिन प्रहलाद के लिए बेहद कष्ट और पीड़ा से गुजरे। जिसे हिंदू परंपरा में अशुभ माना जाता है।
और आठवें दिन होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी जहां होलिका भस्म हो गई और प्रहलाद सुरक्षित अग्नि से वापस निकल आए।

यही कारण है कि  होलाष्टक के इन आठ दिनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता । जिससे इन नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सके।

होलाष्टक के इन आठ दिनों को फलदाई कैसे बनाएं:

शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक में शुभ कार्य करना मना है , लेकिन यह समय दान ,पुण्य ,ध्यान और मंत्र साधना के लिए बेहद अच्छे माने जाते हैं। इन दोनों महामृत्युंजय मंत्र का जाप, भगवान विष्णु ,शिव,  भगवान हनुमान की आराधना विशेष फलदाई होती है।
इन दिनों जरूरतमंदों को अन्न ,वस्त्र का दान करना,भूखे को भोजन कराना शुभ माना जाता है।

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