कांग्रेस ने लगाया दोगलेपन का आरोप, निशिकांत दुबे ने दिया करारा जवाब!

khabar pradhan

संवाददाता

29 May 2025

अपडेटेड: 9:41 AM 0thGMT+0530

कांग्रेस ने लगाया दोगलेपन का आरोप, निशिकांत दुबे ने दिया करारा जवाब!

कांग्रेस ने लगाया दोगलेपन का आरोप, निशिकांत दुबे ने दिया करारा जवाब!

फिलिस्तीन-हमास पर सियासी तूफान….

भारत की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है। इस बार मुद्दा है फिलिस्तीन और हमास को लेकर, जहां कांग्रेस ने बीजेपी पर दोगलेपन का आरोप लगाया, तो बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने पलटवार करते हुए कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। निशिकांत दुबे का कहना है कि कांग्रेस फिलिस्तीन और हमास में अंतर नहीं समझती और वोट बैंक की सियासत के लिए देश की छवि को दांव पर लगा रही है। यह विवाद तब और गहरा गया, जब दुबे ने कुवैत में दिए अपने बयान को लेकर कांग्रेस की आलोचना को “राजनीतिक पाखंड” करार दिया। आइए, इस सियासी जंग को एक ताजा और रोमांचक अंदाज में समझते हैं कि आखिर यह विवाद क्या है और इसके पीछे की कहानी क्या है!

फिलिस्तीन और हमास: विवाद का केंद्र

फिलिस्तीन और हमास को लेकर भारत में सियासी बहस कोई नई बात नहीं है। कांग्रेस ने हाल ही में बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह फिलिस्तीन और हमास को एक ही चश्मे से देखती है और इस मुद्दे पर दोगलापन दिखा रही है। कांग्रेस का कहना है कि फिलिस्तीन एक देश है, जिसके लोगों का आत्मनिर्णय का अधिकार है, जबकि हमास एक उग्रवादी संगठन है, जिसकी हिंसक गतिविधियों की निंदा होनी चाहिए। लेकिन बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस वोट बैंक की खातिर हमास जैसे आतंकी संगठन के साथ फिलिस्तीन को जोड़कर गलत नैरेटिव बना रही है। X पर दुबे ने लिखा, “कांग्रेस को फिलिस्तीन और हमास में अंतर नहीं दिखता, क्योंकि उन्हें सिर्फ वोट चाहिए!”

निशिकांत दुबे का कुवैत कनेक्शन

यह विवाद तब और गहरा गया, जब निशिकांत दुबे ने कुवैत में एक समारोह में फिलिस्तीन के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने वहां कहा कि भारत हमेशा से फिलिस्तीन के लोगों के हक में रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह हमास जैसे आतंकी संगठनों का समर्थन करता है। इस बयान पर कांग्रेस ने तंज कसा और कहा कि दुबे ने पहले तो फिलिस्तीन को आतंकवाद का गढ़ बताया और अब कुवैत में जाकर उसका समर्थन कर रहे हैं। X पर एक यूजर ने लिखा, “28 दिन में निशिकांत दुबे का स्टैंड बदल गया। पहले फिलिस्तीन को हमास के साथ जोड़ा, अब कुवैत में जाकर गीत गा रहे हैं!” दुबे ने इस आलोचना को “राजनीतिक पाखंड” बताते हुए कहा कि कांग्रेस जानबूझकर उनके बयान को तोड़-मरोड़ रही है।

कांग्रेस का आरोप: बीजेपी का दोगलापन

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरते हुए कहा कि वह विदेश नीति में दोगलापन दिखा रही है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने X पर लिखा, “बीजेपी के सांसद पहले फिलिस्तीन को आतंकी संगठनों का गढ़ बताते हैं, फिर कुवैत में जाकर उसके समर्थन में बोलते हैं। यह दोगलापन नहीं तो क्या है?” कांग्रेस का कहना है कि भारत की विदेश नीति हमेशा से फिलिस्तीन के लोगों के हक में रही है, और बीजेपी इस नीति को अपने सियासी फायदे के लिए भटका रही है। उन्होंने यह भी कहा कि हमास और फिलिस्तीन को एक मानना भारत की उस ऐतिहासिक नीति के खिलाफ है, जो फिलिस्तीन के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करती है।

निशिकांत दुबे का पलटवार: “कांग्रेस का वोट बैंक गेम”

निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वह हमेशा से भारत की उस नीति के समर्थन में रहे हैं, जो फिलिस्तीन के लोगों के हक की बात करती है। लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि हमास एक आतंकी संगठन है, जिसका भारत समर्थन नहीं करता। X पर अपने पुराने पोस्ट में दुबे ने लिखा था, “हमास ने छोटे बच्चों तक को हैवानियत से मारा। कांग्रेस को वोट बैंक के लिए राम को टेंट में रखना पड़ता है!” कुवैत में अपने बयान को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि उनका बयान भारत की विदेश नीति के अनुरूप था, और कांग्रेस इसे गलत तरीके से पेश कर रही है। X पर एक यूजर ने दुबे के समर्थन में लिखा, “फिलिस्तीन और हमास अलग हैं। जब मार खाने लगते हैं, तो सब फिलिस्तीन बन जाते हैं, और आतंक मचाने के लिए हमास!”

सोशल मीडिया पर तीखी बहस

इस विवाद ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। X पर फैंस और यूजर्स दो खेमों में बंट गए हैं। कुछ ने निशिकांत दुबे की तारीफ की और कहा कि उन्होंने भारत की विदेश नीति को सही तरीके से पेश किया। एक यूजर ने लिखा, “निशिकांत दुबे ने साफ कर दिया कि भारत फिलिस्तीन के लोगों के साथ है, न कि हमास जैसे आतंकियों के साथ!” वहीं, कुछ यूजर्स ने कांग्रेस का समर्थन करते हुए कहा कि बीजेपी अपने सियासी फायदे के लिए इस मुद्दे को भटका रही है। एक यूजर ने लिखा, “निशिकांत दुबे ने पहले फिलिस्तीन को आतंक का गढ़ बताया, अब कुवैत में जाकर गीत गा रहे हैं। भक्त अब भी तालियां बजा रहे हैं!” यह बहस दिखाती है कि यह मुद्दा न सिर्फ सियासी, बल्कि भावनात्मक स्तर पर भी लोगों को छू रहा है।

फिलिस्तीन और हमास: अंतर को समझें

फिलिस्तीन एक ऐतिहासिक और भौगोलिक क्षेत्र है, जिसके लोग दशकों से अपने आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दूसरी ओर, हमास एक उग्रवादी संगठन है, जो गाजा पट्टी पर शासन करता है और जिसे कई देश आतंकी संगठन मानते हैं। भारत ने हमेशा से फिलिस्तीन के लोगों के हक का समर्थन किया है, लेकिन हमास की हिंसक गतिविधियों की निंदा भी की है। निशिकांत दुबे ने अपने बयान में यही अंतर रेखांकित करने की कोशिश की, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी इस अंतर को धुंधला कर रही है।

क्या है इस विवाद का असर?

यह विवाद न सिर्फ भारत की विदेश नीति को लेकर चर्चा को जन्म दे रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि सियासत में कैसे मुद्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है। निशिकांत दुबे का कुवैत बयान और कांग्रेस का पलटवार दोनों ही 2025 के विधानसभा चुनावों से पहले सियासी माहौल को गर्म कर रहे हैं। यह विवाद भारत की उस छवि को भी प्रभावित कर सकता है, जो वैश्विक मंच पर फिलिस्तीन के समर्थन और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के बीच संतुलन बनाए रखती है।

सियासत का नया रंग

निशिकांत दुबे और कांग्रेस के बीच यह सियासी जंग न सिर्फ फिलिस्तीन और हमास के मुद्दे को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भारत की सियासत में हर मुद्दा वोट बैंक से जुड़ जाता है। दुबे का बयान और कांग्रेस का पलटवार इस बात का प्रतीक है कि सियासत में सिद्धांत और अवसरवाद का खेल हमेशा चलता रहता है। आप क्या सोचते हैं? क्या यह विवाद भारत की विदेश नीति को प्रभावित करेगा, या यह सिर्फ सियासी नौटंकी है?

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