कैसा हो आपका शयनकक्ष वास्तु अनुकूल…

khabar pradhan

संवाददाता

23 May 2025

अपडेटेड: 1:19 PM 0rdGMT+0530

कैसा हो आपका शयनकक्ष वास्तु अनुकूल…

कैसा हो आपका शयनकक्ष वास्तु अनुकूल;


अक्सर ऐसा होता है कि मकान तो बन जाता है तो वास्तु अनुकूल !


लेकिन साजो सामान के रखरखाव में गड़बड़ी हो जाती है या किसी कोने में कौन सा कमरा हो इसके चुनाव में चूक रह जाती है।

आइए हम जानते हैं कैसे बनाएं वास्तु अनुकूल स्वयं का शयन कक्ष ।

1..अगर घर में विवाह योग्य कन्या हो तो घर की वायव्य उत्तर पश्चिम दिशा में उसका संरक्षण अवश्य उसे विवाह के बंधन में बांधने में मदद करेगा पश्चिम या दक्षिण में आप घर के अन्य लोगों का शयन कक्ष बना सकते हैं ।
2..शयन कक्ष की सही दिशा का चुनाव इन तरीकों से करने के बाद देखते हैं कि शयन कक्ष में होने वाले साजो सामान को वास्तु अनुकूल तरीके से कैसे रखें ।

3.. सबसे पहले चर्चा करते हैं पलंग की। पलंग जहां तक संभव हो बढ़िया लकड़ी का ही बना धातु के पलंग नकारात्मक उर्जा देते हैं। पलंग का आकार आयताकार ही होती अच्छा है। अन्य आकार जैसे गोल, अंडाकार त्रिकोण भले ही शयनकक्ष को अधारण रूप दे. पर ये आपको परेशानी में घेर लेंगे। पलंग को दक्षिणी पश्चिमी दीवार से सटाकर रखें। आपका सिरहाना दक्षिण दिशा में रहने से निश्चित ही आप शांतिपूर्वक सो पाएंगे।

4..शयन कक्ष के दक्षिण-पश्चिमी कोने को खाली न रखें। जो भी भारी सामान चाहे वहां रख सकते है। जहां तक संभव हो तिजोरी शयन कक्ष में न रखें पर अगर स्थानाभाव हो, तो दक्षिणी दीवार से सटाकर रखिए, जिससे मुंह उत्तर की ओर खुले। अन्य अलमारियां भी दक्षिण और पश्चिम की दीवार से सटाकर रख सकते हैं।

5..कई बार प्रसाधन कक्ष (ड्रेसिंग रूम) अलग न होने के कारण आपको डेसिंग टेबल शयन कक्ष में ही रखनी पड़ती है, पर ध्यान रहे ये आपके पलंग के सामने न हो। सोते समय आपका अक्स शीशे में नजर नहीं आना चाहिए। ड्रेसिंग टेबल पूर्व या उत्तर की दीवार से सटाकर रखना ठीक रहेगा। स्थानाभाव के कारण अगर आप पलंग के सामने ही रख रहे हैं, तो शीशे पर पर्दा लगाकर रखें अन्यथा बीमारियां आपको घेर लेंगी। अगर आपके शयन कक्ष में कोई बीम है, तो उसके नीचे अपना पलंग न लगाएं।

6..शयन कक्ष में मंदिर बनाने की भूल न ही करें, तो सबसे अच्छा है, क्योंकि मंदिर की पवित्रता बनाए रखना अति आवश्यक है। पर कई बार स्थानाभाव के कारण आपको शयन कक्ष में ही मंदिर रखना पड़ता है। अगर ऐसा है, तो मंदिर कमरे के ईशान कोण में रखें और मंदिर पर पर्दा लगाकर रखें। जब पूजा करनी हो, तब थोड़ी देर पर्दा हटा सकते हैं। अगर आप शयन कक्ष में अटारी (दुछत्ती) बनाना चाहते हैं, तो दक्षिण और पश्चिमी दिशा में ही बनवाएं।

7..सजा-संवरा शयन कक्ष सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करता है, इसलिए शयन कक्ष को हमेशा साफ-सुथरा रखें। सजावट के सामान में फूल, हंस, हाथी वगैरह जो भी रखें, वो जोड़े से रखें, इससे आपका दांपत्य जीवन सुमधुर हो जाएगा।
8..शयन कक्ष में खाने की भूल न करें। शयन कक्ष में खाना खाने से आपकी पाचन शक्ति पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। वैसे तो आप शयन कक्ष में टीवी देखने की आदत भी छोड़ें, पर स्थानाभाव या व्यस्तताभरी जिंदगी में घर का हर सदस्य चंद लम्हे अपनी इच्छानुसार ही बिताना चाहते हैं, जैसे अपना मनपसंद सीरियल देखकर। तो अगर ऐसा हैं, तो टेलीविजन उत्तर दिशा या दक्षिण दिशा में रखें।

9..कई बार शयन कक्ष में पढ़ने की मेज भी रखनी पड़ती है। अगर ऐसा है, तो ये मेज पूर्वी दीवार से सटाकर रखें, जिससे सकारात्मक ऊर्जा लेकर आप पठन कार्य कर सकें। कूलर चा ए.सी. को कमरे के पश्चिम में रखें, पर अगर सर्दियों में हीटर या ब्लोअर से गर्माहट का आनंद लेना हो, तो हीटर वगैरह आग्नेय दिशा में रखें। वास्तु अनुसार बनाएं शानदार शयन कक्ष।

10..स्थानाभाव के कारण आपको शयन कक्ष में ही मंदिर रखना पड़े, तो मंदिर कमरे के ईशान कोण में रखें और मंदिर पर पर्दा लगाकर रखें। जब पूजा करनी हो, तब थोड़ी देर पर्दा हटा सकते हैं…

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