क्रूड ऑयल हुआ रिकार्ड महंगा:पड़ोसी देशों में हाहाकार; भारत में स्थिति नियंत्रण में
संवाददाता
10 March 2026
अपडेटेड: 8:07 PM 0thGMT+0530
10 मार्च 2026
ईरान-अमेरिका तनाव का असर: पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल 55 रुपये महंगा, बांग्लादेश में भी बढ़ा संकट
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध तनाव के कारण सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला। इसके चलते दुनियाभर में तेल संकट गहराने लगा है। खासतौर पर पड़ोसी देशों पाकिस्तान और बांग्लादेश की स्थिति ज्यादा प्रभावित होती नजर आ रही है।
पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्रालय ने युद्ध के मद्देनजर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हालात को देखते हुए कई सख्त कदम उठाने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि सरकारी दफ्तर अब सप्ताह में केवल चार दिन ही खुलेंगे और लगभग 50% कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। इसके अलावा स्कूलों को दो सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है।
सरकार ने अगले दो महीनों तक अपने विभागों के वाहनों के लिए ईंधन की खपत में 50% कटौती करने का फैसला भी किया है। इसके साथ ही इफ्तार पार्टियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। सरकार के मंत्रियों और सलाहकारों ने दो महीने तक वेतन नहीं लेने का निर्णय भी लिया है।
उधर, बांग्लादेश में भी स्थिति गंभीर होती जा रही है। पिछले तीन दिनों से पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं और 9 मार्च से कई पंपों पर ‘नो फ्यूल’ के बोर्ड लग गए हैं। कई विश्वविद्यालयों ने 8 मार्च से समय से पहले बंद होने का ऐलान कर दिया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, 10 मार्च से लागू यह कदम बिजली और ऊर्जा ग्रिड पर दबाव कम करने के लिए उठाया गया है। संभावना है कि कुछ संस्थान 20 दिनों तक बंद रह सकते हैं। बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद ने कहा कि देश को संभावित ऊर्जा संकट से बचाने के लिए सरकार अलग-अलग उपाय कर रही है।
भारत सरकार ने कहा: यहाँ कमी नहीं
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार और शेयर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जबकि एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है।
केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार, जब तक कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक नहीं पहुंचती, तब तक देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने की संभावना नहीं है। सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में पर्याप्त तेल भंडार उपलब्ध है, इसलिए लोगों से घबराकर खरीदारी न करने की अपील की गई है।
इस बीच कालाबाजारी रोकने के लिए एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग अवधि बढ़ा दी गई है। अब सिलेंडर की बुकिंग 21 दिन की जगह 25 दिन बाद की जा सकेगी। दिल्ली में नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बाधित होती है तो कई रेस्तरां और होटल बंद होने की स्थिति में आ सकते हैं।
उधर, अमेरिकी-ईरान तनाव के चलते सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 1,353 अंक गिरकर बंद हुआ। कारोबार के दौरान इसमें 2,494 अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव के कारण एशियाई शेयर बाजारों में भी लगभग 7% तक की गिरावट देखने को मिली।
कच्चे तेल की कीमतों में भी भारी उतार-चढ़ाव रहा। ब्रेंट क्रूड सोमवार को 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, हालांकि बाद में यह गिरकर करीब 97 डॉलर तक आ गया। इससे पहले 1970 के दशक के बाद पहली बार तेल की कीमतों में इतना तेज उछाल देखा गया है।
युद्ध के बावजूद फिलहाल महंगाई पर बड़ा असर नहीं: वित्त मंत्री
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय हालात के बावजूद फिलहाल भारत में महंगाई पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। उनका कहना है कि युद्ध शुरू होने से पहले ही भारतीय तेल बाजार में कीमतों में गिरावट का रुख देखने को मिल रहा था।
उन्होंने बताया कि 2 मार्च तक कच्चे तेल की कीमत 69.01 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 80.16 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, लेकिन देश में महंगाई अभी भी नियंत्रित स्तर पर बनी हुई है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में इसका सीधा प्रभाव पड़ने की आशंका कम है।
रिजर्व बैंक के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमतें अनुमानित स्तर से करीब 10 प्रतिशत अधिक हो जाती हैं, तो महंगाई दर में लगभग 30 आधार अंक तक की बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल सरकार और आर्थिक एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।