गुड़ी पड़वा पर महाकाल मंदिर के शिखर पर लहराएगा ब्रह्म ध्वज, दो हजार साल पुरानी उज्जयिनी परंपरा

khabar pradhan

संवाददाता

14 March 2026

अपडेटेड: 5:20 PM 0thGMT+0530

गुड़ी पड़वा पर महाकाल मंदिर के शिखर पर लहराएगा ब्रह्म ध्वज, दो हजार साल पुरानी उज्जयिनी परंपरा<br>

14 मार्च 2026
उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुड़ी पड़वा के अवसर पर मंदिर के शिखर पर ब्रह्म ध्वज फहराया जाएगा। यह परंपरा लगभग दो हजार वर्ष पुरानी मानी जाती है, जिसकी शुरुआत उज्जयिनी के सम्राट विक्रमादित्य के समय से जुड़ी बताई जाती है।

इस गौरवशाली परंपरा को अविस्मरणीय बनाने के लिए उन्होंने सिक्के भी जारी किए थे महिदपुर के शनि स्त्रोत संस्थान में आज भी यह मुद्राएं संरक्षित रखी है

इतिहासकारों के अनुसार उज्जयिनी प्राचीन काल में भारत का एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है। सम्राट विक्रमादित्य ने यहां कई धार्मिक परंपराओं की शुरुआत की थी, जिनमें महाकाल मंदिर के शिखर पर ब्रह्म ध्वज फहराने की परंपरा भी शामिल है। यह परंपरा आज भी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई जा रही है।

पूराविद डॉक्टर रमन सोलंकी के अनुसार ब्रह्म ध्वज शक्ति साहस और विजय का प्रतीक हैl केसरिया रंग के इस ध्वज में दो पताका तथा उसके बीच में सूर्य का चित्र ,यह चतुर्दिक विजय का प्रतीक है l सम्राट विक्रमादित्य चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर इसी ब्रह्म ध्वज का आरोहण किया करते थे l उन्होंने इस परंपरा पर उज्जैनी मुद्रा भी जारी की थी इस मुद्रा के एक और भगवान शिव सूर्य दंड लिए दिखाई देते हैं, तथा दूसरी ओर उज्जैनी का चिन्ह बना हुआ है l

इतिहास में यह भी उल्लेख मिलता है कि उज्जयिनी में शासन करने वाले शासकों ने भगवान महाकाल के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने के लिए मंदिर के शिखर पर ध्वज चढ़ाने की परंपरा को आगे बढ़ाया।

पुरातात्विक प्रमाणों में भी उज्जयिनी की प्राचीनता दिखाई देती है। कई पुराने सिक्कों पर विशेष चिन्ह और प्रतीक मिले हैं, जो उस समय की धार्मिक मान्यताओं और संस्कृति को दर्शाते हैं।

गुड़ी पड़वा के दिन महाकाल मंदिर में इस विशेष परंपरा का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचकर भगवान महाकाल के दर्शन करते हैं और इस ऐतिहासिक परंपरा के साक्षी बनते हैं।

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