गुप्त नवरात्रि: साधना और शक्ति आराधना का पर्व, भोपाल के मंदिरों में विशेष आयोजन:

khabar pradhan

संवाददाता

20 January 2026

अपडेटेड: 4:54 PM 0thGMT+0530

गुप्त नवरात्रि: साधना और शक्ति आराधना का पर्व, भोपाल के मंदिरों में विशेष आयोजन:


कल 19 जनवरी को गुप्त नवरात्रि के  प्रथम दिवस के पावन अवसर पर राजधानी भोपाल के विभिन्न मंदिरों में विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन संपन्न हुए। सनातन परंपरा में गुप्त नवरात्रि को साधना, तप और सिद्धि का विशेष काल माना जाता है। इस नवरात्रि में सार्वजनिक उत्सवों के बजाय शांत, गूढ़ और अनुशासित उपासना को महत्व दिया जाता है।

भोपाल के प्रमुख देवी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की उपस्थिति देखी गई। कई स्थानों पर मां दुर्गा के दस महाविद्या स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। मंदिरों में विशेष हवन, यज्ञ, मंत्र-जाप और रात्रिकालीन साधनाओं का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने गुप्त व्रत रखकर मां शक्ति से आत्मबल, सुख-शांति और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति की कामना की।

शहर के शक्ति उपासना से जुड़े मंदिरों में पंडितों और साधकों द्वारा तांत्रिक विधि से पूजन किया गया। कुछ मंदिरों में अखंड मंत्र जाप का आयोजन हुआ, वहीं कई स्थानों पर सीमित संख्या में साधकों के लिए विशेष अनुष्ठान संपन्न कराए गए। पूरे वातावरण में मंत्रोच्चार और धूप-दीप की सुगंध से आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया गया।

गुप्त नवरात्रि के दौरान मां काली, मां तारा, मां बगलामुखी सहित अन्य महाविद्या स्वरूपों की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। मंदिरों के पुजारियों के अनुसार इस काल में की गई साधना शीघ्र फल देने वाली मानी जाती है, इसी कारण साधक और श्रद्धालु इसे अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं।

गुप्त नवरात्रि का उद्देश्य केवल सिद्धि प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मसंयम, अनुशासन और आंतरिक शुद्धि भी है। भोपाल में हुए इन आयोजनों ने यह संदेश दिया कि सच्ची भक्ति बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि अंतर्मन की साधना से जुड़ी होती है।

कुल मिलाकर, गुप्त नवरात्रि के अवसर पर भोपाल के मंदिरों में हुए विशेष आयोजनों ने शहर के धार्मिक वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया और श्रद्धालुओं को साधना व शक्ति आराधना के महत्व का अनुभव कराया।

टिप्पणियां (0)