जम्मू-कश्मीर सरकार का पहलगाम से सख्त संदेश, ‘नहीं बख्शे जाएंगे आतंकी!’

khabar pradhan

संवाददाता

27 May 2025

अपडेटेड: 11:11 AM 0thGMT+0530

जम्मू-कश्मीर सरकार का पहलगाम से सख्त संदेश, ‘नहीं बख्शे जाएंगे आतंकी!’

जम्मू-कश्मीर सरकार का पहलगाम से सख्त संदेश, ‘नहीं बख्शे जाएंगे आतंकी!’

आतंक के साये में नई उम्मीद…

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में, जहां आतंकियों ने बेगुनाहों के सुहाग उजाड़े और शांति को भंग करने की कोशिश की, वहां अब सरकार की दमदार आवाज गूंज रही है। हाल ही में हुए आतंकी हमले के बाद, जम्मू-कश्मीर सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को और मजबूत करते हुए एक बड़ा संदेश दिया है। इस हमले ने न केवल स्थानीय लोगों को झकझोरा, बल्कि पूरे देश में गुस्से की लहर पैदा की। अब सरकार ने इस दुखद घटना को एक नई शुरुआत का मौका बनाया है, जहां से आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई का ऐलान किया जा रहा है। आइए, इस खबर को गहराई से समझते हैं और जानते हैं कि जम्मू-कश्मीर सरकार का यह कदम क्यों इतना महत्वपूर्ण है।

पहलगाम हमला: दर्द और गुस्से की कहानी

पहलगाम, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वादियों के लिए जाना जाता है, हाल ही में एक बर्बर आतंकी हमले का गवाह बना। इस हमले में कई बेगुनाहों की जान गई, और कई परिवारों का सुहाग उजड़ गया। आतंकियों ने न केवल पर्यटकों को निशाना बनाया, बल्कि जम्मू-कश्मीर की शांति और पर्यटन को भी चोट पहुंचाने की कोशिश की। इस हमले के बाद सात दिनों तक सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें लोग आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करते दिखे। इस दुखद घटना ने सरकार को और सतर्क कर दिया, और अब जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आतंकियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

सरकार की हुंकार: आतंकवाद पर करारा प्रहार

जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस हमले के बाद अपनी रणनीति को और तेज कर दिया है। ‘ऑपरेशन केलर’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे अभियानों के तहत सुरक्षा बलों ने आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की है। हाल ही में त्राल और शोपियां में हुए एनकाउंटर में छह आतंकियों को ढेर किया गया, और भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति में कोई ढील नहीं होगी। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने भी इस हमले की निंदा करते हुए कहा था कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी, और सुरक्षा बलों को पूरी आजादी दी गई है। यह कदम न केवल आतंकियों के लिए चेतावनी है, बल्कि स्थानीय लोगों को यह भरोसा भी देता है कि सरकार उनके साथ खड़ी है।

पहलगाम से गूंजा संदेश: शांति की वापसी का संकल्प

पहलगाम में हुए इस हमले के बाद सरकार ने इस स्थान को आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत संदेश का प्रतीक बनाने का फैसला किया है। जहां आतंकियों ने खूनखराबा किया, वहां अब सरकार शांति और विकास की बात कर रही है। प्रशासन ने पहलगाम में पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की योजना बनाई है। साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए नए कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का यह कदम न केवल आतंकवाद के खिलाफ एक जवाब है, बल्कि यह कश्मीर की जनता को यह विश्वास दिलाता है कि उनकी सुरक्षा और खुशहाली सरकार की प्राथमिकता है।

सोशल मीडिया पर जनता की आवाज

इस घटना और सरकार की कार्रवाई ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी है। लोगों ने पहलगाम हमले की निंदा करते हुए सरकार के सख्त रुख की तारीफ की है। एक यूजर ने लिखा, “पहलगाम में जो हुआ, वह दिल दहलाने वाला था। लेकिन सरकार का यह जवाब आतंकियों के लिए करारा संदेश है।” वहीं, कुछ लोगों ने सरकार से और तेज कार्रवाई की मांग की, ताकि कश्मीर की शांति को फिर से स्थापित किया जा सके। यह प्रतिक्रियाएं दर्शाती हैं कि जनता आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है और सरकार के कदमों का समर्थन कर रही है।

ऑपरेशन केलर’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’: आतंकियों पर नकेल

जम्मू-कश्मीर में चल रहे ‘ऑपरेशन केलर’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने आतंकियों के खिलाफ एक नई जंग छेड़ दी है। इन अभियानों के तहत सुरक्षा बलों ने न केवल आतंकियों को ढेर किया, बल्कि उनके ठिकानों को भी नष्ट किया है। हाल ही में शोपियां में लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकियों को मार गिराया गया, और त्राल में भी तीन आतंकियों का सफाया किया गया। इन ऑपरेशनों ने आतंकियों की कमर तोड़ दी है और उनकी साजिशों को नाकाम किया है। सरकार का यह रुख साफ है कि आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे।

कश्मीर में बदलता माहौल

पहलगाम हमले के बाद सरकार की त्वरित कार्रवाई और जनता की एकजुटता ने कश्मीर में एक नए माहौल को जन्म दिया है। लोग अब आतंकवाद की निंदा करने में पहले से ज्यादा मुखर हो रहे हैं, जो पहले कम देखा जाता था। यह बदलाव न केवल स्थानीय लोगों की जागरूकता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कश्मीर की जनता अब शांति और विकास की राह पर चलना चाहती है। सरकार का यह संदेश कि वह आतंकियों को बख्शेगी नहीं, इस बदलाव को और मजबूती दे रहा है।

वैश्विक मंच पर भारत का रुख

जम्मू-कश्मीर सरकार का यह कदम न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि वैश्विक मंच पर भी भारत की आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति को रेखांकित करता है। हाल ही में गुलाम नबी आजाद ने कुवैत में पाकिस्तान को आतंकवाद का गढ़ बताकर भारत की इस नीति को और मजबूत किया। जम्मू-कश्मीर सरकार का पहलगाम से दिया गया यह संदेश वैश्विक समुदाय को यह बताता है कि भारत अपनी सुरक्षा और शांति के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

आतंक के खिलाफ एक नया संकल्प

पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने भले ही दुख और गुस्से को जन्म दिया, लेकिन जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस दुख को ताकत में बदल दिया है। जहां आतंकियों ने सुहाग उजाड़ने की कोशिश की, वहां से सरकार ने शांति और सख्ती का संदेश दिया है। ‘ऑपरेशन केलर’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे अभियानों के जरिए आतंकियों पर नकेल कसी जा रही है, और जनता की एकजुटता इस जंग को और मजबूत कर रही है। यह कदम न केवल कश्मीर की शांति की वापसी का प्रतीक है, बल्कि यह भारत की उस अटल नीति को भी दर्शाता है, जिसमें आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है।

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