जल संरक्षण की मिसाल: मोहन यादव ने भोपाल में शीतलदास घाट को किया स्वच्छ
संवाददाता
27 May 2025
अपडेटेड: 10:41 AM 0thGMT+0530
जल संरक्षण की मिसाल: मोहन यादव ने भोपाल में शीतलदास घाट को किया स्वच्छ
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं श्रमदान कर शीतलदास की बगिया घाट की सफाई की। यह नजारा केवल सफाई अभियान तक सीमित नहीं था, बल्कि यह जल संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने न केवल घाट की साफ-सफाई की, बल्कि स्वच्छता मित्रों को सम्मानित कर उनके योगदान को भी सराहा। यह कदम नदियों, तालाबों और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए मध्य प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आइए, इस पहल के महत्व और इसके पीछे की प्रेरणा को गहराई से समझते हैं।
जल गंगा संवर्धन: एक जन अभियान की शुरुआत
‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ मध्य प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य नदियों, कुओं, बावड़ियों और अन्य जल स्रोतों का संरक्षण और पुनर्जनन करना है। भोपाल के शीतलदास की बगिया घाट पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं झाड़ू उठाकर और कचरा हटाकर स्वच्छता का संदेश दिया। यह अभियान केवल सरकारी स्तर पर नहीं, बल्कि जन-जन तक पहुंचने वाला एक आंदोलन बन रहा है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा, “जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। यह हमारी संस्कृति, आस्था और जीवनशैली का हिस्सा है।” उनकी यह बात जल संरक्षण को लेकर एक गहरे दर्शन को दर्शाती है।
शीतलदास की बगिया: ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
शीतलदास की बगिया घाट भोपाल के लिए न केवल एक जल स्रोत है, बल्कि यह शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का भी प्रतीक है। यह घाट स्थानीय लोगों के लिए आस्था और सामुदायिक एकता का केंद्र रहा है। लेकिन समय के साथ कचरे और उपेक्षा के कारण इसकी स्थिति खराब हो रही थी। मुख्यमंत्री के इस अभियान ने न केवल इस घाट को स्वच्छ किया, बल्कि इसे फिर से जीवंत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया। इस कार्यक्रम में स्थानीय लोग, स्वच्छता मित्र और स्वयंसेवी संगठनों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे यह एक सामुदायिक उत्सव में बदल गया।
स्वच्छता मित्रों का सम्मान: एक प्रेरणादायक कदम
इस अभियान की सबसे खास बात रही स्वच्छता मित्रों का सम्मान। मुख्यमंत्री ने उन सफाई कर्मचारियों को सम्मानित किया, जो दिन-रात शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने में जुटे रहते हैं। यह कदम न केवल उनके योगदान को मान्यता देता है, बल्कि समाज में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी काम करता है। एक स्वच्छता मित्र ने कहा, “मुख्यमंत्री जी का हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना हमें गर्व का अहसास देता है।” यह दृश्य सामाजिक समरसता और नेतृत्व की सादगी का एक शानदार उदाहरण था।
सोशल मीडिया पर उत्साह: जनता की प्रतिक्रिया
इस अभियान ने सोशल मीडिया पर भी खूब सुर्खियां बटोरीं। लोगों ने मुख्यमंत्री की इस पहल की जमकर तारीफ की। एक यूजर ने लिखा, “जल संरक्षण के लिए यह अभियान एक मिसाल है। मोहन यादव जी ने स्वयं श्रमदान करके दिखा दिया कि नेतृत्व कर्म से बनता है।” वहीं, कुछ लोगों ने इस अभियान को पूरे राज्य में और गहराई तक ले जाने की मांग की। एक अन्य यूजर ने लिखा, “शीतलदास की बगिया जैसे घाट हमारी धरोहर हैं। इनकी सफाई और संरक्षण हर नागरिक की जिम्मेदारी है।” यह प्रतिक्रियाएं दर्शाती हैं कि यह अभियान जनता के बीच गहरी पैठ बना रहा है।
जल संरक्षण की जरूरत: क्यों है यह अभियान महत्वपूर्ण?
जल संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। मध्य प्रदेश, जो नदियों और जल स्रोतों से समृद्ध है, वहां जल संकट की चुनौतियां भी कम नहीं हैं। नदियों का प्रदूषण, तालाबों का सूखना और कुओं की उपेक्षा ने पर्यावरण और जीवन को प्रभावित किया है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ इस दिशा में एक ठोस कदम है, जो न केवल जल स्रोतों की सफाई पर जोर देता है, बल्कि लोगों को इसके प्रति जागरूक भी करता है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर सभी से अपील की कि वे अपने आसपास के जल स्रोतों को बचाने में योगदान दें।
मोहन यादव का नेतृत्व: सादगी और संकल्प का मिश्रण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह कदम उनकी सादगी और जनता से जुड़ाव को दर्शाता है। अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच उन्होंने स्वयं श्रमदान में हिस्सा लिया और स्वच्छता मित्रों के साथ समय बिताया। यह न केवल उनकी नेतृत्व शैली को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वह पर्यावरण संरक्षण को लेकर कितने गंभीर हैं। उनके इस कदम ने अन्य नेताओं और जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक मिसाल कायम की है कि वे अपने क्षेत्रों में ऐसी पहल को बढ़ावा दें।
जल संरक्षण का नया अध्याय
‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह एक लंबी यात्रा की शुरुआत है। मध्य प्रदेश सरकार ने इस अभियान को पूरे राज्य में फैलाने की योजना बनाई है, जिसमें नदियों, तालाबों और बावड़ियों की सफाई और संरक्षण शामिल है। इस अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक संगठनों को भी शामिल किया जा रहा है, ताकि यह एक जन आंदोलन बन सके। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा, “जल हमारी धरोहर है, और इसे बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।” यह संदेश न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है।